मंडप से थाने तक पहुंची शादी
- अजीबोगरीब विवाद: हरदोई में फेरों के वक्त दूल्हे के छोटे भाई ने मजाक में दुल्हन का पल्लू खींचा, जिस पर दुल्हन के चाचा ने आपत्ति जताई।
- मंडप बना अखाड़ा: नशे में धुत कुछ बारातियों और घरातियों के बीच मारपीट हो गई; दूल्हा दिनेश और दुल्हन का चचेरा भाई रामू घायल।
- 5 फेरों पर लगी ब्रेक: मारपीट इतनी बढ़ गई कि आधी रात को 5 फेरों के बाद शादी की रस्में रोकनी पड़ीं और दोनों पक्षों को थाने जाना पड़ा।
- थाने में हुआ ‘Insta’ समझौता: पुलिस की मौजूदगी और प्रधान की मध्यस्थता में ₹4,500 के ‘इलाज खर्च’ पर समझौता हुआ।
- हैप्पी एंडिंग: थाने से लौटकर शाम को बची हुई 2 भांवरें (फेरे) पूरी की गईं और नन्ही की विदाई हुई।
जब पांचवें फेरे के बाद सीधे थाने पहुंची बारात!
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के अतरौली इलाके में एक ऐसी शादी देखने को मिली, जो हमेशा के लिए यादगार बन गई। राजकुमार की बेटी नन्ही और सीतापुर के रहने वाले दिनेश के फेरे चल रहे थे। मंडप में भक्ति और उल्लास का माहौल था, लेकिन तभी दूल्हे के छोटे भाई मुकेश को एक ‘अजीब मजाक’ सूझा। मुकेश ने फेरों के दौरान ही दुल्हन का पल्लू खींच दिया।
दुल्हन के चाचा पिंकू ने इस हरकत पर तुरंत ऐतराज जताया। बस फिर क्या था, बात से बात बढ़ी और शादी के घर में शराब के नशे में धुत कुछ लोगों ने रंग में भंग डाल दिया।
लात-घूंसे चले, दूल्हे का सिर फूटा… और रुक गई शादी
मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई। मंडप में लात-घूंसे चलने लगे। इस भयंकर मारपीट में खुद दूल्हा दिनेश सिर पर चोट खा बैठा और दुल्हन का चचेरा भाई रामू भी लहूलुहान हो गया। शादी की खुशियां चीख-पुकार में बदल गईं और आधी रात को ही शादी की रस्मों को पांचवें फेरे पर ही रोक देना पड़ा।
₹4500 में सुलझा ‘पल्लू विवाद’, पुलिस के सामने बनी बात
| विवाह का स्टेज | क्या हुआ? |
| आधी रात (मंडप) | 5 फेरे हुए, पल्लू खींचने पर मारपीट हुई, दूल्हा घायल हुआ और शादी रुकी। |
| गुरुवार दोपहर (थाना अतरौली) | दोनों पक्ष थाने पहुंचे। गांव के प्रधान पति रामलखन की मौजूदगी में घायलों के इलाज के लिए ₹4,500 का हर्जाना तय हुआ। |
| गुरुवार शाम (वापसी) | अतरौली पुलिस के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह की देखरेख में बिना लिखित शिकायत के समझौता हुआ और दोनों पक्ष घर लौटे। |
अधूरी भांवरें हुईं पूरी, शाम को सजी विदाई की कार
थाने की पंचायत में जब गुस्सा शांत हुआ, तो दोनों परिवारों को एहसास हुआ कि बच्चों का भविष्य दांव पर है। गुरुवार की शाम दोनों पक्ष वापस गांव के मंडप में लौटे। जो दो फेरे रात को अधूरे रह गए थे, उन्हें पूरे मंत्रोच्चार के साथ पूरा किया गया। दूल्हे दिनेश ने दुल्हन नन्ही की मांग भरी, सभी रस्में पूरी कीं और आखिरकार पुलिसिया पचड़े से निकलकर दुल्हन की मुस्कुराते हुए ससुराल के लिए विदाई हुई।