नई दिल्ली। NEET (UG) परीक्षा में हुई धांधली को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की सीधी चेतावनी मिलने के बाद असम और बिहार की सरकारों ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। CJP के कड़े रुख के आगे झुकते हुए दोनों राज्यों ने नीट प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और समर्थकों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले और एफआईआर (FIR) वापस लेने का ऐलान कर दिया है।
संसद से लेकर सड़क तक बने इस चौतरफा दबाव के बीच सरकारों ने हिरासत में लिए गए सैकड़ों छात्रों और नागरिकों की तुरंत रिहाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
बिहार में 600 से अधिक लोगों को राहत, दर्ज FIR और नोटिस रद्द
बिहार सरकार के गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि 26 जुलाई से पहले प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले किसी भी छात्र या नागरिक के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
- 25 जुलाई ‘बिहार बंद’ का असर: पुलिस ने बंद के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया था।
- नाबालिगों की रिहाई: इनमें से 339 नाबालिगों को पहले ही छोड़ दिया गया था।
- मुकदमे वापस: बाकी बचे 355 लोगों पर दर्ज एफआईआर, कारण बताओ नोटिस और दर्ज केसों को पूरी तरह रद्द करते हुए तुरंत रिहाई के आदेश दे दिए गए हैं।
असम गृह विभाग का फैसला: 5 केस वापस, 13 लोग होंगे रिहा
दूसरी ओर, असम के गृह विभाग ने भी सोमवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी 5 आपराधिक केस कानूनन वापस लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए 13 लोगों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
“लिखित आश्वासन नहीं तो फिर सड़कों पर होंगे छात्र”- CJP की दो टूक
जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी अनशन/आंदोलन भले ही 25 जुलाई की वार्ता के बाद स्थगित कर दिया गया हो, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है। CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने साफ कर दिया है कि सरकार को मंगलवार तक का समय दिया गया है।
“25 जुलाई की वार्ता में मुकदमे वापस लेने पर सहमति बनी थी। हम सरकार की तरफ से मंगलवार तक लिखित आश्वासन (Written Assurance) का इंतजार कर रहे हैं। अगर समझौते का सम्मान नहीं हुआ, गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया और भविष्य में कार्रवाई न करने की गारंटी नहीं मिली, तो CJP दोबारा पूरे देश में आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी।”
— आशुतोष रांका, राष्ट्रीय प्रवक्ता (CJP)