नई दिल्ली: करवा चौथ का त्योहार हर साल सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना के साथ व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। देशभर में इस त्योहार को लेकर उत्साह रहता है, लेकिन इसे मनाने की परंपराएं हर क्षेत्र में अलग-अलग हैं। कहीं सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती है, तो कहीं करवा माता की पूजा और लोकगीतों के जरिए इस पर्व की रौनक बढ़ाई जाती है। आइए जानते हैं, देश के अलग-अलग राज्यों में करवा चौथ किस तरह मनाया जाता है।
पंजाब में सरगी के बिना अधूरा माना जाता है व्रत का आगाज
पंजाब में करवा चौथ की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा से होती है। इस दौरान सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसमें फल, मिठाइयां, फेनी और सुहाग से जुड़ी चीजें शामिल होती हैं। महिलाएं सरगी खाने के बाद दिनभर व्रत रखती हैं।
यहां करवा चौथ केवल उपवास तक सीमित नहीं है। महिलाएं एक साथ बैठकर लोकगीत गाती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। परिवार के सदस्यों के बीच यह परंपरा त्योहार की खुशियों और आपसी जुड़ाव को भी खास बनाती है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में करवा माता की पूजा का खास महत्व
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में करवा चौथ पर करवा माता की पूजा की विशेष परंपरा है। कुछ जगहों पर महिलाएं दीवार पर गेरू से करवा माता, चंद्रमा और सूर्य की आकृतियां बनाती हैं। इसके बाद इनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
इस दौरान महिलाएं एक-दूसरे के साथ करवा बदलती हैं, जिसे आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। शाम के समय करवा चौथ की कथा सुनने का भी विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, कथा और पूजा इस व्रत की पारंपरिक धार्मिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं।
राजस्थान में सोलह शृंगार और पारंपरिक पूजा से बढ़ती है रौनक
राजस्थान में करवा चौथ की परंपराओं में पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और सोलह शृंगार का खास स्थान है। महिलाएं इस दिन सज-संवरकर पूजा करती हैं और सुहाग से जुड़ी रस्मों में हिस्सा लेती हैं।
राज्य के कुछ इलाकों में पूजा के दौरान छलनी के बजाय घास या सींक से बनी विशेष तीलियों का इस्तेमाल करने की परंपरा भी बताई जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और रस्मों में अंतर हो सकता है, लेकिन त्योहार का केंद्र पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना ही रहती है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में भी दिख रहा करवा चौथ का प्रभाव
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी उत्तर भारतीय समुदायों के बीच करवा चौथ मनाया जाता है। हालांकि, इन क्षेत्रों में स्थानीय धार्मिक परंपराओं और व्रतों का अपना अलग महत्व है। दक्षिण भारत में मंगला गौरी जैसे व्रत प्रचलित हैं, जबकि महाराष्ट्र में भी अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा रही है।
महाराष्ट्र में करवा चौथ मनाने वाली महिलाएं मिट्टी के करवे की पूजा करती हैं और व्रत के नियमों का पालन करती हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की आराधना भी की जाती है। उत्तर भारतीय संस्कृति के प्रभाव और अलग-अलग समुदायों की परंपराओं के कारण कई जगहों पर यह त्योहार उत्साह के साथ मनाया जाने लगा है।
परंपराएं अलग, लेकिन त्योहार का भाव एक
करवा चौथ की खासियत यही है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने के तरीके भले अलग हों, लेकिन इसके पीछे की भावना एक जैसी है। पंजाब की सरगी, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में करवा माता की पूजा, राजस्थान का पारंपरिक शृंगार और दूसरे राज्यों में प्रचलित रीति-रिवाज इस पर्व को विविध रंग देते हैं।
परिवार के साथ पूजा करना, कथा सुनना और पारंपरिक रस्मों में हिस्सा लेना इस त्योहार को खास बनाता है। यही वजह है कि क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद करवा चौथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।