नई दिल्ली। देश की शीर्ष नौकरशाही और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेताओं के बीच की अंदरूनी रस्साकशी अब खुलेआम चौराहों पर आ गई है।
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और झारखंड के गोड्डा से BJP सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के बीच शुरू हुआ वाकयुद्ध अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है।
गर्ग ने एक पॉडकास्ट के दौरान अपने कार्यकाल के दौरान घटे घटनाक्रमों का पर्दाफाश करते हुए सांसद पर ‘अनुचित दबाव’ बनाने और बदला लेने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक झूठी शिकायतें पहुँचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
LIC सिफारिश और ‘इनकार’ का बदला: क्या है विवाद की मुख्य जड़?
सुभाष गर्ग के दावों के मुताबिक, यह पूरा मामला उस समय का है जब वे वित्त मंत्रालय में कार्यरत थे। गर्ग का आरोप है कि सांसद निशिकांत दुबे उनके दफ्तर पहुंचे थे और LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) के चेयरमैन के जरिए अपना एक निजी काम करवाने की सिफारिश की थी।
गर्ग के अनुसार, जब उन्होंने यह कहकर स्पष्ट इनकार कर दिया कि LIC उनके प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में नहीं आती और वे अनुचित मांगें पूरी नहीं करते, तो दोनों के बीच रिश्ते कड़वे हो गए। गर्ग का दावा है कि इस इनकार के बाद ही सांसद ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और मार्च 2018 में सरकार को एक शिकायती पत्र भेजा, जिसे तत्कालीन सरकार ने नजरअंदाज कर खारिज कर दिया था।
संसदीय समिति, ‘आयुष्मान भारत’ और PMO से आई वो सीक्रेट कॉल
विवाद का सबसे नाट्य रूपांतरण 2018-19 के बजट सत्र के बाद संसद की एक स्थायी समिति की बैठक में देखने को मिला। गर्ग के अनुसार:
- ‘आयुष्मान भारत’ योजना की घोषणा अंतिम समय पर हुई थी, जिससे बजट में उसका अलग से हेड (Line Item) तैयार नहीं हो पाया था।
- संसदीय समिति में जब सांसदों ने देरी पर सवाल किया, तो वित्त सचिव गर्ग ने स्पष्ट किया कि फैसला देर से होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’ के फंड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- नृपेंद्र मिश्रा का फोन: गर्ग का दावा है कि दफ्तर पहुँचते ही उन्हें PMO से तत्कालीन प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा का फोन आया। मिश्रा ने पूछा कि उन्होंने समिति में यह क्यों कहा कि ‘सरकार समय पर फैसले नहीं लेती?’
बाद में गर्ग को पता चला कि निशिकांत दुबे ने सीधे PMO पहुंचकर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया था ताकि उनके इनकार का बदला लिया जा सके।
सांसद निशिकांत दुबे का पलटवार: ‘रातोंरात हटाए गए अफसर का मानसिक संतुलन बिगड़ा’
BJP सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने पूर्व वित्त सचिव के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तीखा पलटवार किया है। दुबे ने कहा कि सुभाष गर्ग अपनी अक्षमता और अज्ञानता के कारण पद से रातोंरात हटाए गए थे और अब उसी नाकामी की खीझ मिटाने के लिए अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
सांसद दुबे ने अपने 2018 के पत्र का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोई काल्पनिक शिकायत नहीं की थी, बल्कि तत्कालीन अधिकारी की कार्यशैली और प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए थे। दुबे ने कानूनी कार्रवाई और मानहानि की चेतावनी देते हुए गर्ग के दावों को महज एक ‘बर्खास्त अफसर का विलाप’ करार दिया।
नौकरशाही बनाम सियासत: बंद कमरों का सच आया बाहर
एक तरफ जहां पूर्व वित्त सचिव इसे जनप्रतिनिधि द्वारा किया गया राजनीतिक ब्लैकमेल बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ दल के सांसद इसे अफसरशाही की नाकामी और पद से हटने का फ्रस्ट्रेशन करार दे रहे हैं। दोनों ओर से जारी इस तीखे हमले ने एक बार फिर भारत के नीति-निर्माण के पीछे कार्यपालिका और विधायिका के जटिल और कड़वे रिश्तों की पोल खोलकर रख दी है।