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बार-बार घबराहट, तेज धड़कन और सांस फूलना? जानिए पैनिक अटैक क्या है और इससे कैसे संभलें

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक चिंताएं और लगातार स्क्रीन के संपर्क में रहना मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। कई बार यही तनाव अचानक इतनी तीव्र घबराहट में बदल जाता है कि व्यक्ति खुद को संभाल नहीं पाता। ऐसी स्थिति को Panic Attack कहा जाता है।

क्या होता है पैनिक अटैक?

पैनिक अटैक अचानक आने वाला ऐसा डर या बेचैनी का दौरा है, जिसमें व्यक्ति को लगता है कि अभी कुछ बहुत बुरा होने वाला है। यह स्थिति कुछ मिनटों के लिए बेहद तीव्र हो सकती है और कई बार व्यक्ति को लगता है कि वह अपना नियंत्रण खो रहा है।

किन लक्षणों से पहचानें

पैनिक अटैक के दौरान दिल की धड़कन तेज हो सकती है, सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, पसीना आने लगता है और शरीर कांप सकता है। कुछ लोगों को सीने में दबाव, चक्कर, हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्नपन भी महसूस होता है। कई बार ऐसा लगता है जैसे शरीर और मन एक-दूसरे से अलग हो गए हों।

इसके पीछे क्या वजह हो सकती है?

लगातार तनाव, किसी पुराने मानसिक आघात, डर से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड या दिल से जुड़ी परेशानियां इसकी वजह बन सकती हैं। ज्यादा कैफीन, शराब या नशे का सेवन भी जोखिम बढ़ाता है। अगर परिवार में किसी को ऐसी समस्या रही हो, तो संभावना और बढ़ सकती है।

अटैक आए तो तुरंत क्या करें?

सबसे पहले अपनी सांसों पर ध्यान दें। धीरे-धीरे चार सेकंड तक सांस लें, चार सेकंड रोकें, फिर चार सेकंड में छोड़ें और कुछ सेकंड रुकें। यह प्रक्रिया शरीर को शांत करने में मदद करती है। इसके साथ ग्राउंडिंग तकनीक भी असरदार मानी जाती है—अपने आसपास की पांच चीजें देखें, चार चीजों को छुएं, तीन आवाजें सुनें, दो खुशबू पहचानें और एक स्वाद महसूस करें। इससे ध्यान डर से हटकर वर्तमान पर आता है।

मानसिक रूप से खुद को कैसे संभालें

खुद से बार-बार कहें कि यह स्थिति स्थायी नहीं है और कुछ ही देर में सामान्य हो जाएगी। कैफीन और शराब से दूरी रखें। रोज़ थोड़ी देर ध्यान, मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज करें।

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?

अगर ऐसे दौरे बार-बार आने लगें या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। कई मामलों में Cognitive Behavioral Therapy काफी मददगार होती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाओं की सलाह भी दे सकते हैं।

रोजमर्रा की आदतें जो मदद करेंगी

हर दिन कम से कम 30 मिनट टहलना, 7 से 8 घंटे की नींद लेना, स्क्रीन टाइम सीमित करना और मनपसंद गतिविधियों के लिए समय निकालना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

news desk

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