अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान किए गए पैसों की चोरी मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने में जुटी फॉरेंसिक और आईटी एक्सपर्ट्स की टीम को एक बड़ी कामयाबी मिली है। जांचकर्ताओं ने मंदिर परिसर और दान पेटियों की गिनती वाले कमरे (Cash Counting Room) से जानबूझकर डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज को सफलतापूर्वक रिकवर (Recover) कर लिया है।
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इस रिकवर किए गए वीडियो क्लिप में एक कर्मचारी की शर्मनाक करतूत कैमरे में कैद हो गई है।
इस रिकवर फुटेज ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे कैश की गिनती करने वाले कुछ आरोपी नोटों को संभालते वक्त बड़ी चालाकी से उन्हें अपने मोज़ों और जेबों में छिपा रहे थे।
इस सनसनीखेज खुलासे के बीच, रविवार को अयोध्या पुलिस की एक स्पेशल टीम सर्कल ऑफिसर आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में जिला जेल पहुंची। यहाँ न्यायिक हिरासत में बंद पांच मुख्य आरोपियों से करीब दोपहर 1:50 बजे से पूछताछ शुरू की गई।
ये हैं वो 5 आरोपी: रामाशंकर मिश्रा, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे।
अलग-अलग बैरकों में क्यों शिफ्ट किए गए आरोपी? जेल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर एक बड़ा कदम उठाते हुए शनिवार को ही सभी आरोपियों को अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट कर दिया था। पहले ये सभी एक साथ बंद थे। प्रशासन को डर था कि ये आरोपी आपस में झगड़ा कर सकते हैं या फिर पुलिस की पूछताछ से बचने के लिए एक जैसा मनगढ़ंत बयान तैयार कर जांच को भटका सकते हैं।
जांचकर्ताओं की टीम केवल सीसीटीवी फुटेज तक ही सीमित नहीं है। अब आरोपियों के बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड और फाइनेंशियल दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की गई रकम का बंदरबांट कैसे हुआ, हर संदिग्ध की इसमें क्या भूमिका थी और गिनती वाले कमरे से बाहर निकालने के बाद यह पैसा कहां-कहां ट्रांसफर किया गया।
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