वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। ईरान-अमेरिका तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण जो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर जाकर तबाही मचा रहा था, वह अब पूरी तरह शांत हो चुका है।
दोनों देशों के बीच युद्धविराम (Ceasefire) और आपसी सहमति बनने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार, 6 जुलाई को क्रूड ऑयल की कीमतें खिसककर 70 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के भी नीचे चली गईं।
हालांकि, सोमवार को बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। दावों के उलट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से समुद्री यातायात अभी भी 100% सामान्य नहीं हो पाया है। इस जमीनी हकीकत के सामने आते ही कच्चे तेल की कीमतों में निचले स्तरों से एक मामूली रिकवरी देखी गई:
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी बेहद अस्थायी है और बाजार का ओवरऑल ट्रेंड अब मंदी (Bearish) की ओर ही है।
कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए केवल युद्धविराम ही नहीं, बल्कि OPEC+ (ओपेक प्लस) देशों का एक बड़ा फैसला भी काम कर रहा है। सऊदी अरब और रूस की अगुवाई वाले इस संगठन ने तेल की सप्लाई बढ़ाने का पूरा मन बना लिया है:
उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी: OPEC+ देश आगामी अगस्त महीने से बाजार में 1,88,000 बैरल प्रति दिन (bpd) अतिरिक्त तेल की सप्लाई शुरू कर देंगे।
इसके साथ ही सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान जैसे देशों ने मिलकर लगभग 8,00,000 bpd उत्पादन को बाजार में वापस बहाल कर दिया है।
दरअसल, OPEC+ देश साल 2023 में लागू की गई तेल उत्पादन कटौती (Production Cuts) के फैसले को अब धीरे-धीरे खत्म कर रहे हैं। अगस्त में होने वाली यह बढ़ोतरी इस प्रक्रिया का दूसरा अंतिम चरण है। इसके बाद सितंबर 2026 में इस योजना के आखिरी चरण को भी पूरा कर लिया जाएगा।
इसका असर क्या होगा? बाजार में जैसे-जैसे कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे कीमतों पर दबाव और बढ़ेगा। आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में और अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाने का एक सुनहरा मौका साबित होगा।
गया: मगध क्षेत्र में सावन का महीना केवल भगवान शिव की भक्ति और हरियाली से…
नई दिल्ली: किआ भारत में अपनी नई एसयूवी Kia Sorento को लॉन्च करने की तैयारी…
उदयपुर: राजस्थान के मेवाड़ अंचल में भील आदिवासी समुदाय की गवरी लोकनाट्य परंपरा अपनी अनूठी…
अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक टकराव अब और तेज होता दिखाई दे रहा है।…
कल्पना कीजिए उस दौर की, जब भारत में कंप्यूटर आम लोगों के लिए किसी अजूबे…
1984 के सिख विरोधी दंगे के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के…