अगस्त 2026 ने दुनिया को गर्मी का ऐसा रिकॉर्ड दिखाया है, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में वैश्विक औसत तापमान प्री-इंडस्ट्रियल स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर रहा। यह सिर्फ वैश्विक स्तर पर ही असाधारण नहीं था, बल्कि भारत में भी अगस्त ने करीब 125 साल का गर्मी का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, अगस्त 2026 में दुनिया का औसत सतही वायु तापमान करीब 16.96 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
यह तापमान 19वीं सदी के प्री-इंडस्ट्रियल औसत से लगभग 1.65°C अधिक रहा। वैज्ञानिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगस्त में पहली बार वैश्विक औसत तापमान ने 1.5°C की सीमा को पार किया।
यह वही तापमान सीमा है जिसे 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के तहत दीर्घकालिक वैश्विक वार्मिंग को सीमित करने के प्रयासों में बेहद अहम माना जाता है।
गर्मी का असर सिर्फ यूरोप या दूसरे देशों तक सीमित नहीं रहा। भारत में भी अगस्त 2026 बेहद गर्म रहा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 साल 1901 के बाद भारत में सबसे गर्म अगस्त रहा। महीने के औसत तापमान के साथ-साथ न्यूनतम तापमान ने भी ऐतिहासिक स्तर दर्ज किया।
इसका मतलब है कि रातें भी सामान्य से ज्यादा गर्म रहीं, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम हुई।
अगस्त के दौरान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की चरम घटनाएं देखने को मिलीं। कहीं भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचाई तो कहीं सूखे और जंगल की आग ने मुश्किलें बढ़ाईं।
नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। वैज्ञानिक इस तरह की घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के बीच संभावित संबंधों का अध्ययन कर रहे हैं।
इंडोनेशिया, ग्रीस और बेल्जियम जैसे देशों में जंगल की आग की घटनाएं सामने आईं, जबकि हंगरी और रोमानिया जैसे यूरोपीय देशों को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ा।
पश्चिमी यूरोप में लगातार गर्म मौसम का असर नदियों, मिट्टी और खेती पर भी दिखाई दिया। नदियों में पानी का स्तर कम हुआ और मिट्टी की नमी घटने से किसानों की परेशानियां बढ़ीं।
मई के बाद से जारी गर्म परिस्थितियों ने कई इलाकों में फसलों पर दबाव बढ़ाया। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार बढ़ता तापमान कृषि और जल संसाधनों के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है।
अगस्त की रिकॉर्ड गर्मी का असर जमीन तक सीमित नहीं रहा। कोपरनिकस के मुताबिक, इस दौरान वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी बेहद ऊंचे स्तर पर रहा।
ट्रॉपिकल पैसिफिक में अल नीनो से जुड़ी गर्म परिस्थितियों ने भी वैश्विक तापमान को प्रभावित किया। अगर समुद्र का तापमान ऊंचा बना रहता है तो आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न पर इसका असर पड़ सकता है।
1.5°C का आंकड़ा सिर्फ एक तापमान रिकॉर्ड नहीं है। जलवायु वैज्ञानिक इसे ग्लोबल वार्मिंग के खतरनाक प्रभावों को सीमित करने की कोशिशों में एक महत्वपूर्ण सीमा के तौर पर देखते हैं।
तापमान बढ़ने के साथ ही अत्यधिक गर्मी, भारी बारिश, सूखा, जंगल की आग, समुद्र के गर्म होने और कृषि पर दबाव जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र लगातार देशों से ग्रीनहाउस गैसों, खासकर CO2 उत्सर्जन में तेजी से कटौती करने की अपील करता रहा है।
अगस्त 2026 के आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक तापमान का बढ़ना अब केवल भविष्य की चिंता नहीं रह गया है। भारत में 125 साल का रिकॉर्ड टूटना और वैश्विक औसत का 1.5°C से ऊपर जाना इस बात को रेखांकित करता है कि जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से महसूस किया जा रहा है।
आने वाले महीनों में तापमान, समुद्र की गर्मी और अल नीनो जैसी परिस्थितियों पर वैज्ञानिकों की नजर रहेगी। इन कारकों का असर वैश्विक मौसम और भारत समेत कई देशों के मौसम पर पड़ सकता है।
उज्जैन की सड़कों के चौड़ीकरण के लिए जब करीब 8 फीट ऊंची ‘खड़े हनुमान जी’…
बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। मायावती ने अपने भतीजे…
अगर आप भी आईफोन के दीवाने हैं, तो एप्प्ल की ये खबर आपको चौंका सकती…
चीन में आयोजित जूनियर महिला हॉकी एशिया कप 2026 (Junior Women's Hockey Asia Cup 2026)…
आरक्षण को लेकर देश में चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने…
नई दिल्ली: Apple ने अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo लॉन्च कर दिया है और…