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मशीनें लगीं, घंटों कोशिश हुई… फिर भी नहीं हिले हनुमान! चमत्कार या कोई रहस्य?

उज्जैन की सड़कों के चौड़ीकरण के लिए जब करीब 8 फीट ऊंची ‘खड़े हनुमान जी’ की प्राचीन प्रतिमा को हटाने की कोशिश हुई, तो कुछ ऐसा हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। क्रेन और जेसीबी से कई घंटों तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। अब यही सवाल चर्चा का विषय है कि आखिर प्रतिमा के जमीन से न हिलने की वजह क्या है? भक्त इसे चमत्कार मान रहे हैं, जबकि प्रशासन और विशेषज्ञ इसके पीछे की तकनीकी और ऐतिहासिक वजह तलाश रहे हैं। तो चलिए जानते हैं इस प्रतिमा का इतिहास और इससे जुड़ी पूरी कहानी।

क्या है खड़े हनुमान जी की प्रतिमा का इतिहास?

उज्जैन के कंठाल से छत्री चौक मार्ग पर स्थित खड़े हनुमान मंदिर का इतिहास करीब 170 साल पुराना माना जाता है। हालांकि, मंदिर में स्थापित करीब 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को कुछ विशेषज्ञ परमार काल यानी लगभग 1000 साल पुराना मानते हैं। ऐसी संभावना भी जताई जाती है कि यह प्रतिमा राजा भोज के समय की हो सकती है।

प्रतिमा मालवा क्षेत्र के मजबूत बैसाल्ट पत्थर से बनी बताई जाती है और इसका एक बड़ा हिस्सा जमीन के भीतर होने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों में इस प्रतिमा के प्रति गहरी आस्था है। इसी वजह से इन्हें ‘डॉक्टर हनुमान’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन और प्रार्थना करने से लोगों को रोगों से मुक्ति मिलती है।

सड़क चौड़ीकरण के बीच क्यों चर्चा में आई प्रतिमा?

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी दौरान सती गेट और कंठाल चौराहा क्षेत्र में सड़क विस्तार के लिए मंदिर के ढांचे को हटाया गया। इसके बाद करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा को भी दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की गई।

क्रेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों की मदद से कई घंटों तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। बताया गया कि करीब 40 घंटे तक कोशिश के बावजूद इसे हटाया नहीं जा सका। इसके बाद यह मामला आस्था और चमत्कार की चर्चाओं के बीच पहुंच गया।

भक्तों ने माना चमत्कार

प्रतिमा के न हिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचने लगे। कई लोग इसे भगवान हनुमान का चमत्कार मान रहे हैं और मंदिर में पूजा-अर्चना व महाआरती कर रहे हैं।

हालांकि, प्रशासन इस पूरे मामले को तकनीकी और वैज्ञानिक नजरिए से भी समझने की कोशिश कर रहा है। प्रतिमा की उम्र, शिल्प शैली और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जांच के साथ यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर वह जमीन से क्यों नहीं निकल पा रही है। इसके लिए विशेषज्ञों और IIT इंदौर की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है।

फिलहाल ‘खड़े हनुमान जी’ की प्रतिमा के न हिलने का रहस्य बरकरार है। भक्त इसे आस्था का चमत्कार मान रहे हैं, जबकि वैज्ञानिक जांच इस रहस्य के पीछे की वास्तविक वजह सामने ला सकती है। अब सबकी नजरें विशेषज्ञों की जांच और रिपोर्ट पर टिकी हैं।

news desk

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