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आकाश आनंद की विदाई के बाद अब कौन? मायावती के सामने उत्तराधिकारी चुनने की बड़ी चुनौती

बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया जब आकाश आनंद के ससुर और कभी मायावती के बेहद करीबी रहे अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया था। माना जा रहा था कि इसके बाद आकाश के लिए पार्टी में वापसी का रास्ता खुल सकता है, लेकिन घटनाक्रम ने पूरी तस्वीर बदल दी।

अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आकाश आनंद को पार्टी से क्यों निकाला गया, बल्कि यह है कि मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर अब किस चेहरे पर भरोसा किया जाएगा?

ससुर ने राजनीति छोड़ी, फिर भी आकाश को नहीं मिली राहत

मायावती ने आकाश आनंद को लेकर साफ संदेश दिया था कि अगर उन्हें पार्टी में स्वतंत्र तरीके से काम करना है तो उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को सक्रिय राजनीति से अलग होना होगा।

अशोक सिद्धार्थ ने मायावती की इस शर्त को स्वीकार करते हुए राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि उनके लिए मायावती का आदेश सर्वोपरि है।

इसके बाद माना जा रहा था कि आकाश आनंद के लिए पार्टी में वापसी की जमीन तैयार हो गई है। लेकिन करीब 17 घंटे के भीतर ही घटनाक्रम ने अलग मोड़ ले लिया और मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया।

आखिर आकाश आनंद से मायावती की नाराजगी क्यों?

आकाश आनंद और मायावती के बीच मतभेद कोई नया मामला नहीं है। इसकी जड़ करीब तीन साल पहले दिखाई देने लगी थी।

नवंबर 2023 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान आकाश आनंद ने बीएसपी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूछा था कि क्या पार्टी में ऊंचे पदों पर बैठे कुछ लोग बीएसपी को बाहरी लोगों से ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने संगठन में योग्य लोगों को उचित जिम्मेदारी देने और बदलती राजनीति के मुताबिक पार्टी को अपनी कार्यशैली बदलने की जरूरत पर भी जोर दिया था।

दिलचस्प बात यह रही कि इस भाषण के कुछ ही सप्ताह बाद मायावती ने आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

उत्तराधिकारी बने, फिर पद छीना गया

10 दिसंबर 2023 को आकाश आनंद को मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया गया और उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी भी दी गई।

लेकिन यह रिश्ता लंबे समय तक सहज नहीं रहा।

मई 2024 में मायावती ने आकाश आनंद से उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां वापस ले लीं और उन्हें राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया। यानी जिस नेता को कुछ महीने पहले भविष्य का चेहरा बनाया गया था, वही अचानक पार्टी की शीर्ष जिम्मेदारियों से बाहर हो गया।

हालांकि, करीब डेढ़ महीने बाद ही मायावती ने अपना फैसला बदल दिया और आकाश आनंद को फिर से उत्तराधिकारी की भूमिका में ला दिया।

वापसी के बाद फिर शुरू हुआ विवाद

आकाश आनंद की राजनीतिक वापसी के बाद उन्हें संगठन में फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। लेकिन 2025 में एक बार फिर मायावती और आकाश के रिश्ते में तनाव सामने आया।

मार्च 2025 में मायावती ने पहले आकाश से जिम्मेदारियां वापस लीं और फिर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। उस समय मायावती ने आकाश पर राजनीतिक परिपक्वता की कमी और अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आने जैसे आरोप लगाए थे।

हालांकि, कुछ समय बाद आकाश की फिर वापसी हुई और उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।

यानी पिछले कुछ वर्षों में आकाश आनंद का राजनीतिक सफर उत्तराधिकारी बनने, पद गंवाने, पार्टी से बाहर होने और फिर वापस आने के बीच झूलता रहा।

अशोक सिद्धार्थ क्यों बने विवाद के केंद्र?

आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ कभी मायावती के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। डॉक्टर रहे अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के कहने पर सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा था।

वह बीएसपी संगठन में आगे बढ़े, विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचे और पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

बाद में उनकी बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी आकाश आनंद से हुई। इसके बाद अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक रिश्ता मायावती के परिवार से भी जुड़ गया।

यहीं से पार्टी के भीतर उनके प्रभाव और आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा तेज हुई।

मायावती ने आखिर क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?

मायावती की नाराजगी का मुख्य बिंदु कथित तौर पर पार्टी अनुशासन, संगठन में समानांतर प्रभाव और आकाश आनंद की राजनीतिक दिशा से जुड़ा रहा है।

मायावती ने आरोप लगाया था कि अशोक सिद्धार्थ पार्टी और बहुजन आंदोलन की तुलना में निजी तथा पारिवारिक हितों को अधिक महत्व दे रहे हैं। उनका मानना था कि इसका असर आकाश आनंद की राजनीति पर भी पड़ रहा है।

अशोक सिद्धार्थ ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि वह आकाश को गुमराह नहीं कर रहे हैं।

आकाश की एक सोशल मीडिया पोस्ट भी बनी वजह?

मौजूदा घटनाक्रम में एक और बात चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के बाद आकाश आनंद ने मायावती के फैसले को सार्वजनिक तौर पर उस तरह समर्थन नहीं दिया, जिसकी पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी।

बताया जाता है कि आकाश से मायावती के संदेश को सोशल मीडिया पर साझा करने और सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद करने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

यही घटनाक्रम दोनों के बीच भरोसे के संकट को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

आकाश ने पद लेने से भी किया था इनकार?

सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया कि आकाश आनंद इस बार पार्टी में कोई औपचारिक पद लेने के इच्छुक नहीं थे। वह बिना पद के पार्टी के लिए काम करने को तैयार बताए गए।

अगर ऐसा है तो यह मायावती की संगठनात्मक सोच से एक बड़ा अंतर माना जा सकता है। बीएसपी में अंतिम राजनीतिक और संगठनात्मक नियंत्रण मायावती के हाथ में रहा है, जबकि आकाश आनंद ने कई मौकों पर युवाओं, सोशल मीडिया और संगठन में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है।

अब मायावती के सामने सबसे बड़ा सवाल- अगला उत्तराधिकारी कौन?

आकाश आनंद के बाहर होने के बाद बीएसपी में उत्तराधिकार का सवाल फिर खुल गया है।

मायावती के भाई आनंद कुमार को संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही रामजी गौतम को भी महत्वपूर्ण भूमिका मिली है।

वहीं आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद की राजनीतिक सक्रियता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। उन्हें संगठन से जुड़े कामों में जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब उनके भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, ईशान आनंद को मायावती का अगला राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा है, यह फिलहाल राजनीतिक अटकल है, कोई आधिकारिक घोषणा नहीं।

बीएसपी के लिए यह सिर्फ परिवार का मामला नहीं

आकाश आनंद प्रकरण को केवल मायावती और उनके भतीजे के बीच पारिवारिक विवाद के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।

इसके पीछे बीएसपी के संगठनात्मक ढांचे, नई पीढ़ी के नेतृत्व, मायावती की राजनीतिक शैली और पार्टी में भविष्य के नेतृत्व का सवाल भी जुड़ा है।

आकाश आनंद को जब पहली बार उत्तराधिकारी बनाया गया था, तब इसे बीएसपी में पीढ़ीगत बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा गया था। लेकिन बार-बार उनकी जिम्मेदारियां छीने जाने और वापस दिए जाने से यह संकेत भी मिला कि मायावती अभी पार्टी की कमान पूरी तरह किसी दूसरे हाथ में देने के लिए तैयार नहीं हैं।

अब नजर मायावती के अगले कदम पर

आकाश आनंद के निष्कासन के बाद बीएसपी की राजनीति में एक बड़ा खाली स्थान बना है। अब यह देखना अहम होगा कि मायावती खुद संगठन की कमान पहले की तरह संभालती हैं या किसी नए चेहरे को धीरे-धीरे आगे बढ़ाती हैं।

फिलहाल इतना साफ है कि आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य और बीएसपी का अगला उत्तराधिकार मॉडल दोनों फिर से अनिश्चित हो गए हैं।

news desk

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