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रामदास आठवले बोले- ‘जातिवाद खत्म हो तो आरक्षण छोड़ देंगे’, आरक्षण पर फिर क्यों गरमाई बहस?

आरक्षण को लेकर देश में चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर देश से जातिवाद पूरी तरह खत्म हो जाता है, तो वह आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं। आठवले का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं।

आठवले ने रखी आरक्षण खत्म करने की शर्त

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था जाति आधारित सामाजिक असमानता से जुड़ी है।

उन्होंने कहा, “अगर जातिवाद खत्म हो तो हम आरक्षण छोड़ने को तैयार हैं। जब तक जातिवाद खत्म नहीं होगा, आरक्षण लागू रहेगा।”

आठवले का कहना है कि जब तक समाज में जाति के आधार पर भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी।

झारखंड में भी दे चुके हैं ऐसा बयान

यह पहली बार नहीं है जब रामदास आठवले ने आरक्षण को जातिवाद से जोड़कर यह बात कही है। इससे पहले पिछले सप्ताह झारखंड की राजधानी रांची में भी उन्होंने इसी तरह का बयान दिया था।

रांची में उन्होंने कहा था कि अगर जाति व्यवस्था खत्म हो जाती है, तो वह आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं।

लगातार दो राज्यों में दिए गए इन बयानों के बाद आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस फिर चर्चा में आ गई है।

दिल्ली में ‘आरक्षण हटाओ’ आंदोलन से बढ़ी थी बहस

आरक्षण का मुद्दा हाल के दिनों में दिल्ली में भी सुर्खियों में रहा। अगस्त में जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था।

प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाना चाहिए। इस दौरान 50 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था।

सोशल मीडिया पर भी ‘आरक्षण हटाओ’ के नाम से अभियान चलाया गया, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

बिहार में उठी आरक्षण बढ़ाने की मांग

दूसरी ओर बिहार में आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर भी प्रदर्शन हुआ। पटना में अनुसूचित जाति और OBC वर्ग से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ संघर्ष समिति’ के नेतृत्व में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों की मांग 65 फीसदी आरक्षण लागू करने की थी। फिलहाल राज्य में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी है।

बिहार में जाति आधारित सर्वे के आंकड़ों के आधार पर तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार ने आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 फीसदी करने का फैसला लिया था। हालांकि, पटना हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक करार दिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

सरकार के मंत्रियों के बयानों से भी गरमाया मुद्दा

आरक्षण के मुद्दे पर NDA के दूसरे नेता भी अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों की रक्षा के साथ-साथ अन्य सामाजिक वर्गों की आशंकाओं को दूर करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी कहा था कि किसी एक सामाजिक वर्ग के हितों की रक्षा का परिणाम दूसरे वर्ग के शोषण के रूप में नहीं निकलना चाहिए।

BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से की थी मुलाकात

आरक्षण को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री और BJP अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कुछ लोगों से मुलाकात भी की थी।

इस मुलाकात में हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और रण बहादुर सिंह समेत आंदोलन से जुड़े लोग शामिल थे। नड्डा ने आगे भी बैठक करने की बात कही थी, हालांकि अगली बैठक को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

आठवले के बयान से फिर सामने आया असली सवाल

रामदास आठवले के ताजा बयान ने आरक्षण की बहस को एक अलग दिशा दे दी है। उनके बयान का मूल तर्क यह है कि आरक्षण तभी खत्म हो सकता है जब जाति आधारित भेदभाव और जातिवाद पूरी तरह खत्म हो जाए।

ऐसे में अब बहस सिर्फ आरक्षण की सीमा या उसके लाभार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी अहम हो गया है कि सामाजिक भेदभाव खत्म करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव का सही आधार क्या हो सकता है।

आरक्षण पर बहस आगे किस दिशा में जाएगी?

एक तरफ जाति आधारित आरक्षण खत्म करने की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ SC, ST और OBC वर्गों से आरक्षण बढ़ाने और मौजूदा अधिकारों की रक्षा की मांग हो रही है। रामदास आठवले का ताजा बयान इसी व्यापक बहस के बीच आया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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  2. आरक्षण पर फिर छिड़ी बहस, रामदास आठवले ने बता दी ‘खत्म करने’ की शर्त
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news desk

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