नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लरिश स्टे बीएंडबी’ में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस प्रतिष्ठान में आग लगी, वह ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (बीएंडबी) योजना के तहत पंजीकृत था। हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने इस योजना को वापस लेने का फैसला किया है। खास बात यह है कि महज आठ दिन पहले ही सरकार ने इस योजना का नया मसौदा जारी किया था, जिसमें कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए थे।
बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत दिल्ली के निवासी अपने घर के एक या अधिक कमरों को मेहमानों के लिए किराए पर उपलब्ध करा सकते थे। इसका मकसद पर्यटकों और बाहर से आने वाले लोगों को कम लागत पर ठहरने की सुविधा देना था, ताकि उन्हें होटल के मुकाबले अपेक्षाकृत सस्ता और घरेलू माहौल मिल सके।
इस योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति सीधे तौर पर अपने घर को किराए के आवास में नहीं बदल सकता था। इसके लिए सरकार की ओर से निर्धारित विभिन्न अनुमतियां और लाइसेंस लेना अनिवार्य था। अनुमति मिलने के बाद ही मकान मालिक अपने घर के एक या अधिक कमरों को मेहमानों के लिए उपलब्ध करा सकता था।
बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। उस समय दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं। सरकार का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और आम लोगों को अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध कराना था।
हालांकि शुरुआत के बाद यह योजना अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। लंबे समय तक यह लगभग ठंडे बस्ते में पड़ी रही और बहुत कम लोगों ने अपने घरों को होम स्टे या बीएंडबी इकाइयों के रूप में पंजीकृत कराया।
इसके बाद अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में भी इस योजना पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद इसे फिर से सक्रिय करने और व्यापक स्तर पर लागू करने की कोशिश शुरू हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 तक इस योजना के तहत 432 मकानों में 2,200 से अधिक कमरे पंजीकृत किए जा चुके थे।
दिल्ली सरकार ने 26 मई 2026 को बीएंडबी योजना का नया मसौदा जारी किया था। इस मसौदे में पुरानी व्यवस्था में कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए थे।
नए ड्राफ्ट के तहत बीएंडबी इकाइयों को सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और कमरों के आकार के आधार पर दो श्रेणियों—गोल्ड और सिल्वर—में विभाजित करने का प्रस्ताव रखा गया था। साथ ही अधिकतम आठ कमरों और 16 बिस्तरों तक संचालन की अनुमति देने की योजना बनाई गई थी।
सरकार का उद्देश्य था कि मेहमानों को बेहतर सुविधाएं मिलें और आवासीय क्षेत्रों में संचालित ऐसे प्रतिष्ठानों के लिए स्पष्ट मानक तय किए जा सकें।
प्रस्तावित नीति के अनुसार, गोल्ड श्रेणी के लिए कमरों का न्यूनतम आकार 120 वर्ग फुट रखा गया था। इस श्रेणी में बेहतर साज-सज्जा, उच्च स्तर की सुविधाएं और अतिरिक्त व्यवस्थाएं अनिवार्य की गई थीं।
वहीं सिल्वर श्रेणी के लिए कमरों का न्यूनतम आकार 100 वर्ग फुट निर्धारित किया गया था। इसमें बुनियादी सुविधाओं के साथ संचालन की अनुमति देने का प्रावधान था।
नाश्ता और ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने वाले घरों को इन्हीं मानकों के आधार पर वर्गीकृत करने की योजना बनाई गई थी।
नए मसौदे में सुरक्षा को सबसे अहम मुद्दा बनाया गया था। सभी बीएंडबी इकाइयों के लिए अतिथि रजिस्टर रखना अनिवार्य प्रस्तावित था। इसके अलावा पुलिस सत्यापन, विदेशी मेहमानों से संबंधित नियमों का पालन और रिकॉर्ड का रखरखाव भी जरूरी किया गया था।
मसौदे के अनुसार प्रत्येक इकाई में आग बुझाने के उपकरण, प्राथमिक उपचार किट और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था उपलब्ध होना अनिवार्य था। सीसीटीवी कैमरे केवल प्रवेश द्वार और सामान्य उपयोग वाले क्षेत्रों तक सीमित रखने का प्रस्ताव था, ताकि सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन बना रहे।
नए ड्राफ्ट में कमरों और साझा क्षेत्रों की नियमित सफाई सुनिश्चित करना जरूरी था। कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में निस्तारित करने और पर्याप्त वेंटिलेशन उपलब्ध कराने की शर्त भी शामिल की गई थी।
इसके साथ ही परिसर में मकान मालिक या केयरटेकर की मौजूदगी अनिवार्य रखने का प्रस्ताव था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
प्रस्तावित नीति के तहत केवल आवासीय संपत्तियों को ही बीएंडबी योजना का हिस्सा बनाया जाना था। इनमें रेस्तरां, बार या अन्य किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति नहीं थी।
सरकार का मानना था कि इससे पर्यटकों को स्थानीय परिवेश में रहने का अनुभव मिलेगा और मकान मालिकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा होंगे।
मसौदे पर हितधारकों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए थे, लेकिन उससे पहले ही मालवीय नगर हादसे ने पूरी योजना को सवालों के घेरे में ला दिया।
दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा है कि सरकार आधिकारिक रूप से बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना को वापस लेने जा रही है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत लाइसेंस प्राप्त सभी प्रतिष्ठानों की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई प्रतिष्ठान निर्धारित सीमा से अधिक कमरे संचालित करता हुआ पाया गया तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
मंत्री के अनुसार, मालवीय नगर स्थित ‘फ्लरिश स्टे’ को वर्ष 2024 में बीएंडबी योजना के तहत सिल्वर श्रेणी में छह कमरों के संचालन का लाइसेंस दिया गया था। यह लाइसेंस वर्ष 2027 तक वैध था।
हालांकि जांच के दौरान सामने आया कि प्रतिष्ठान कथित तौर पर अपनी स्वीकृत क्षमता से लगभग चार गुना अधिक कमरे संचालित कर रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार वहां करीब 25 कमरे बनाए गए थे। इतना ही नहीं, प्रतिष्ठान के पास अनिवार्य अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी नहीं था।
मालवीय नगर अग्निकांड के बाद अब न केवल इस प्रतिष्ठान की भूमिका की जांच हो रही है, बल्कि पूरी बीएंडबी व्यवस्था और उसके क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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