गाजा और लेबनान मोर्चे पर जारी युद्ध के बीच इजरायल अब अपने ही घर में अंदरूनी बगावत और भारी राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। सेना भर्ती (Draft Conscription) में छूट को लेकर भड़की हिंसा ने देश को गृहयुद्ध जैसे मुहाने पर ला खड़ा किया है। सोमवार रात करीब 25,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स (हरदी समुदाय) प्रदर्शनकारियों ने ‘बेइट लिड’ मिलिट्री जेल पर धावा बोल दिया। आक्रोशित भीड़ ने सेना के बेस की बाउंड्री तोड़ दी और सैन्य पुलिस से भिड़ गई।
यह हिंसक झड़प तब शुरू हुई जब सेना में भर्ती से छूट पाने पहुंचे एक येशिवा (धार्मिक) छात्र को मिलिट्री पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने पूरे इजरायल में आग में घी डालने का काम किया है।
इजरायल में सभी यहूदी पुरुषों के लिए सेना (IDF) में सेवाएं देना अनिवार्य है, लेकिन दशकों से हरदी (Haredi) समुदाय के येशिवा छात्रों को तोराह (पवित्र ग्रंथ) की पढ़ाई के नाम पर इसमें छूट मिलती आ रही थी।
यह विवाद सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि इजरायल के अस्तित्व और राजनीति से जुड़ा हुआ है:
एक तरफ जहां इजरायल बाहरी दुश्मनों से सीमा पर लड़ रहा है, वहीं अंदरूनी मोर्चे पर ‘धर्म बनाम राष्ट्र सेवा’ की इस जंग ने देश के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे की नींव हिला दी है।
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