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लाठीचार्ज के बाद छात्रों के समर्थन में क्यों खुल कर उतरी कांग्रेस? मानसून सत्र में कैसे बदली कांग्रेस की रणनीति?

नई दिल्ली। राजनीतिक पंडित अक्सर कहते हैं कि भारतीय राजनीति में मौसम और मिजाज बदलने में वक्त नहीं लगता। कांग्रेस कुछ समय पहले तक नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठा रही थी, राहुल गांधी छात्रों से संवाद भी कर रहे थे। लेकिन सीजेपी के आंदोलन से उसने दूरी बनाई हुई थी। लेकिन लाठीचार्ज के बाद आखिर ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस अब दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन के पक्ष में खुल कर खड़ी हो गई।

संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में हुआ ‘संसद चलो’ मार्च केवल छात्रों का आंदोलन भर नहीं रहा, बल्कि इसने भारतीय राजनीति में एक नया मोर्चा खोल दिया। जब जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ तो कांग्रेस समेत विपक्षी दल भी आक्रामक हो गए।

हिचकिचाहट से ‘सड़क युद्ध’ तक: कांग्रेस ने क्यों बदली रणनीति?

अब तक कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल युवाओं के इन बड़े आंदोलनों (जैसे कॉकरोच जनता पार्टी – CJP द्वारा प्रायोजित प्रदर्शन) को दूर से समर्थन दे रहे थे। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस दो वजहों से इस प्रोटेस्ट से दूरी बनाई हुई थी। एक तो ये कि ये प्रोटेस्ट सीजेपी का था। जिसके बारे में कहा जा रहा था कि वो आम आदमी पार्टी की बैकिंग से प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी वजह ये थी कि कहीं आंदोलन पर ‘राजनीतिक ठप्पा’ न लग जाए। लेकिन सोमवार को हुई लाठीचार्ज की घटना ने पूरी पटकथा बदल दी।

जब संसद परिसर के ठीक बाहर छात्रों को खदेड़ा गया और कई प्रदर्शनकारी अस्पताल पहुँचे, तो कांग्रेस ने इसे सीधे ‘लोकतंत्र और युवाओं पर हमला’ करार दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी घायल छात्रों से मिलने अस्पताल गए। उसके बाद पीएम आवास से थोड़ी दूरी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य सांसदों सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

अब कांग्रेस की मांग सिर्फ परीक्षा सुधार की नहीं, बल्कि पीएम, गृहमंत्री और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सीधे इस्तीफे की बन चुकी है। इसके अलावा कांग्रेस सेवा दल ने प्रदर्शनकारी छात्रों को खाद्य सामग्री भी बांटा। वहीं कांग्रेस लीगल सेल को निर्देश दिया गया कि आंदोलन में जिन छात्रों पर कानूनी कार्रवाई हुई है उनकी मदद की जाए।

राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह वक्त बताएगा। लेकिन दिल्ली की सड़कों पर हुआ लाठीचार्ज और उसके बाद राहुल-प्रियंका का धरने पर बैठना इस बात का साफ संकेत है कि पेपर लीक का मुद्दा मानसून सत्र में संसद से लेकर सड़क तक गूंजेगा।

news desk

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