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Malviya Nagar Agnikand: आखिरी सांस तक एक-दूजे का साथ नहीं छोड़ा, बाथरूम में गले मिले दंपति के शव; मालवीय नगर अग्निकांड ने रुला दिया

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को ऐसी पीड़ा दी है, जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सके। इस दर्दनाक हादसे के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने बचावकर्मियों से लेकर आम लोगों तक सभी की आंखें नम कर दीं। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पहली मंजिल के एक बंद बाथरूम से दंपति के शव बरामद हुए, जो अंतिम क्षणों में भी एक-दूसरे को गले लगाए हुए थे।

आग से बचने के लिए बाथरूम में ली थी शरण

प्रत्यक्षदर्शियों और बचाव दल के अनुसार, जब इमारत में आग तेजी से फैलने लगी और जहरीला धुआं पूरे परिसर में भर गया, तब दंपति ने खुद को बचाने के लिए बाथरूम में शरण ली। उन्हें उम्मीद थी कि बंद कमरा और वहां मौजूद पानी कुछ समय तक उन्हें सुरक्षित रख सकेगा और तब तक राहत टीमें पहुंच जाएंगी।

लेकिन कुछ ही देर में धुएं ने बाथरूम को भी अपनी चपेट में ले लिया। जब दमकलकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो वहां का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। महिला टॉयलेट सीट पर और पुरुष पास रखी कुर्सी पर बैठे मिले। दोनों बुरी तरह झुलस चुके थे, लेकिन आखिरी समय तक एक-दूसरे का हाथ और साथ नहीं छोड़ा।

एक ही हादसे में उजड़ गया पूरा परिवार

इस अग्निकांड ने गुरुग्राम निवासी विवेक अग्रवाल के परिवार को भी गहरा घाव दिया है। जानकारी के अनुसार, विवेक अपने पिता राधेश्याम अग्रवाल के इलाज के सिलसिले में दिल्ली आए थे। उनके पिता साकेत स्थित एक अस्पताल में भर्ती थे। परिवार अस्पताल के पास बने गेस्ट हाउस में ठहरा हुआ था, जहां यह हादसा हुआ।

बताया जा रहा है कि आग लगने के दौरान विवेक ने एक रिश्तेदार को फोन कर मदद मांगने की कोशिश की थी। उन्होंने घबराहट में सिर्फ इतना कहा, “यहां आग लग गई है…” और कुछ ही क्षण बाद कॉल कट गई। इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। बाद में विवेक समेत उनके परिवार के आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई।

आग से ज्यादा जानलेवा साबित हुआ धुआं

अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे में आग से ज्यादा नुकसान जहरीले धुएं ने पहुंचाया। संकरे गलियारों और पर्याप्त वेंटिलेशन की कमी के कारण पूरी इमारत कुछ ही मिनटों में धुएं से भर गई। कई लोग अपने कमरों से बाहर निकलने से पहले ही बेहोश हो गए।

बेसमेंट और अन्य हिस्सों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए दमकलकर्मियों को लोहे के शटर और ग्रिल काटकर रास्ता बनाना पड़ा। लंबे रेस्क्यू अभियान के बाद लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक कई जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो चुकी थीं।

21 लोगों की मौत के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

मालवीय नगर अग्निकांड में कुल 21 लोगों की मौत हुई है। इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में इमारतों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकास मार्गों और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद जांच जारी है और प्रशासन पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है।

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