केरल विधानसभा चुनाव 2026 के एक्जिट पोल्स ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक दशक तक सत्ता से बाहर रहने के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF (United Democratic Front) शानदार वापसी करता दिख रहा है। जहाँ 2021 में पिनाराई विजयन ने इतिहास रचते हुए दोबारा सत्ता हासिल की थी, वहीं इस बार कांग्रेस ने ‘कमबैक’ की ऐसी पटकथा लिखी है जिसने लेफ्ट के अभेद्य किले को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।
पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार की तस्वीर पूरी तरह उलटती नजर आ रही है:
केरल विधानसभा चुनाव 2026 के एक्जिट पोल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्ता का पलड़ा पूरी तरह से कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन की ओर झुकता दिख रहा है। जहाँ 2021 के चुनावों में वामपंथी गठबंधन (LDF) ने 99 सीटों के साथ प्रचंड जीत हासिल की थी, वहीं इस बार उनके 49 से 62 सीटों पर सिमटने का अनुमान है, जो उनके लिए एक बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
इसके विपरीत देखे तो, पिछली बार मात्र 41 सीटों पर रुकने वाला UDF इस बार शानदार वापसी करते हुए 78 से 90 सीटों के साथ भारी बढ़त बनाता दिख रहा है। केरल में बहुमत के लिए 71 सीटों की आवश्यकता होती है, जिसे UDF आसानी से पार करता दिख रहा है।
कांग्रेस की इस संभावित जीत के पीछे सबसे बड़ा हाथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रियता को माना जा रहा है। केरल कांग्रेस लंबे समय से ‘ए’ और ‘आई’ समूहों की आपसी खींचतान से जूझ रही थी। राहुल गांधी ने वायनाड के सांसद के तौर पर राज्य में सक्रियता दिखाई।
प्रियंका गांधी ने व्यक्तिगत रूप से उन वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की जो हाशिए पर चल रहे थे। उन्होंने ‘डोर-टू-डोर’ कैंपेनिंग के जरिए कार्यकर्ताओं में जोश भरा और नाराज नेताओं को एक मंच पर लाकर खड़ा किया। इस ‘गांधी फैक्टर’ ने पार्टी के भीतर के कलह को खत्म कर उसे एक चुनावी मशीन में बदल दिया।
विपक्ष के नेता के रूप में वी.डी. सतीशन ने विधानसभा में सरकार को भ्रष्टाचार और नीतिगत विफलताओं पर घेरा। उनकी ‘पार्लियामेंट्री स्किल’ ने जनता के बीच यह संदेश दिया कि कांग्रेस सत्ता संभालने के लिए तैयार है।
प्रदेश अध्यक्ष के. सुधाकरण ने पार्टी के ‘सेमी-कैडर’ मॉडल को लागू किया। उन्होंने ब्लॉक और बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं (कैडर) को फिर से सक्रिय किया, जो पिछले दो चुनावों से सुस्त पड़े थे।
केरल में मुस्लिम और ईसाई समुदाय की आबादी काफी प्रभावशाली है। पिछले चुनाव में लेफ्ट ने इस वोट बैंक में दरार लाई थी। इस बार कांग्रेस ने वायनाड से राहुल गांधी के प्रभाव और स्थानीय मुद्दों (जैसे बफर जोन विवाद) के जरिए इन समुदायों का भरोसा फिर से जीता। UDF के घटक दल IUML का अपनी सीटों पर मजबूत प्रदर्शन कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुआ।
कांग्रेस ने इस बार दिखावटी वादों के बजाय ‘रोजगार और आर्थिक न्याय’ पर ध्यान दिया। सरकारी नौकरियों में खाली पदों को भरने का वादा। किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि। गृहणियों के लिए आर्थिक सहायता योजना और इन योजनाओं ने मध्यम वर्ग और युवा मतदाताओं को कांग्रेस की ओर आकर्षित किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिनाराई विजयन अभी भी राज्य के सबसे लोकप्रिय नेता हैं, लेकिन उनकी सरकार के खिलाफ बढ़ता असंतोष कांग्रेस के लिए ‘लकी’ साबित हुआ। अगर 4 मई को नतीजे एक्जिट पोल के अनुसार रहे, तो यह न केवल केरल कांग्रेस बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी के लिए एक बड़ा टॉनिक होगा।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रविवार, 1…
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon की Great Indian Festival Diwali Edition सेल में प्रीमियम स्मार्टफोन Samsung Galaxy…
देश की राजधानी दिल्ली में रविवार (1 नवंबर) को कांग्रेस और INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव…
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी तैयारी तेज कर…
बॉलीवुड के गलियारो से एक बेहद ही दुखद खबर सामने आ रही है। बॉलीवुड के…
करवा चौथ के चार दिन बाद अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत…