भारत में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी बन चुका है। पर्यावरण थिंक टैंक ‘काउंसिल फॉर एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’ (CEEW) की ताजा रिपोर्ट ने भविष्य की जो तस्वीर पेश की है, वह बेहद चिंताजनक है। एआई-संचालित प्लेटफॉर्म CRAVIS के डेटा विश्लेषण के अनुसार, आने वाले दो दशकों में भारतीयों को साल में 15 से 40 अतिरिक्त ऐसे दिनों का सामना करना होगा, जब पारा सामान्य से काफी ऊपर रहेगा।
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब केवल दिन की गर्मी से बचना काफी नहीं होगा।
बढ़ती गर्मी का असर केवल सेहत पर ही नहीं, बल्कि देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भी पड़ेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण और मध्य भारत के कुछ राज्यों में कुदरत का दोहरा प्रहार देखने को मिल सकता है।
यह भविष्यवाणियां CRAVIS सिस्टम द्वारा की गई हैं, जो IMD और IITM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के पिछले 40 वर्षों के डेटा का विश्लेषण करता है। यह प्लेटफॉर्म 2070 तक के जलवायु अनुमान तैयार करने में सक्षम है, जिससे स्पष्ट है कि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर इसका विनाशकारी असर पड़ सकता है।
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