नई दिल्ली/दुबई। अमेरिका-ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत दी है, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के लिए भी खुशियां लाई हैं जिनके अपने पिछले 4 महीनों से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के युद्ध क्षेत्र में फंसे थे।
जहाजों की आवाजाही को लेकर जारी ताज़ा आंकड़ों ने इस संकट की गंभीरता और भविष्य की चुनौतियों को उजागर किया है।
भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, पिछले 107 दिनों से 13 भारतीय कार्गो जहाज इस खतरनाक जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं।
समझौते के बाद सोमवार सुबह एक सुखद तस्वीर सामने आई। ब्लूमबर्ग के ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, भारतीय LNG टैंकर ‘दिशा’ (Dishaa) होर्मुज से बाहर निकलता दिखाई दिया है।
यह जहाज 1 मार्च से कतर से गैस लोड करने के बाद से फंसा हुआ था। फिलहाल यह यूएई के उत्तर में ओमान की ओर बढ़ रहा है, जो व्यापारिक बहाली का पहला बड़ा संकेत है।
शिपिंग डेटा कंपनी केपलर (Kpler) के मुताबिक, खाड़ी के अंदर इस समय करीब 600 जहाज बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सैकड़ों जहाज बाहर एंट्री के लिए खड़े हैं।
वैश्विक शिपिंग संगठनों ने चेतावनी दी है कि भले ही रास्ता खुल गया हो, लेकिन सुरक्षा स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक सामान्य आवाजाही में समय लगेगा। यदि सैकड़ों जहाज एक साथ निकलने की कोशिश करेंगे, तो ‘समुद्री जाम’ लग सकता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाएगा। जानकारों का मानना है कि युद्ध से पहले जैसी स्थिति लौटने में कई महीने लग सकते हैं।
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