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होर्मुज संकट: 107 दिन बाद टूटेगी ‘समुद्री कैद’, 562 भारतीय नाविकों की घर वापसी का रास्ता साफ; लेकिन अभी ‘जाम’ का खतरा बाकी

नई दिल्ली/दुबई। अमेरिका-ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत दी है, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के लिए भी खुशियां लाई हैं जिनके अपने पिछले 4 महीनों से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के युद्ध क्षेत्र में फंसे थे।

जहाजों की आवाजाही को लेकर जारी ताज़ा आंकड़ों ने इस संकट की गंभीरता और भविष्य की चुनौतियों को उजागर किया है।

562 भारतीय नाविक और 13 जहाज: ‘मौत के साये’ से बाहर निकलने की तैयारी

भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, पिछले 107 दिनों से 13 भारतीय कार्गो जहाज इस खतरनाक जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं।

  • कहाँ हैं भारतीय: 329 नाविक होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में हैं, जबकि 233 ओमान की खाड़ी की ओर फंसे हैं।
  • खौफनाक मंजर: इन 4 महीनों में इस रूट पर 46 जहाजों पर हमले हुए। भारतीय क्रू वाले 5 जहाजों को भी निशाना बनाया गया, जिससे नाविकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता बनी हुई थी।

‘दिशा’ ने भरी उड़ान: भारतीय टैंकर की हलचल से जगी उम्मीद

समझौते के बाद सोमवार सुबह एक सुखद तस्वीर सामने आई। ब्लूमबर्ग के ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, भारतीय LNG टैंकर ‘दिशा’ (Dishaa) होर्मुज से बाहर निकलता दिखाई दिया है।

यह जहाज 1 मार्च से कतर से गैस लोड करने के बाद से फंसा हुआ था। फिलहाल यह यूएई के उत्तर में ओमान की ओर बढ़ रहा है, जो व्यापारिक बहाली का पहला बड़ा संकेत है।

600 जहाजों का ‘महाजाम’ और 30 दिन का ‘क्लीनिंग’ मिशन

शिपिंग डेटा कंपनी केपलर (Kpler) के मुताबिक, खाड़ी के अंदर इस समय करीब 600 जहाज बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सैकड़ों जहाज बाहर एंट्री के लिए खड़े हैं।

  • ट्रैफिक क्रैश: फरवरी में जहां रोजाना 100 जहाज गुजरते थे, वहीं 7 जून को यह संख्या घटकर सिर्फ 2 रह गई थी।
  • सी-माइंस का खतरा: ईरान ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के लिए बिछाई गई समुद्री माइंस (Sea Mines) को हटाने में कम से कम 30 दिन लगेंगे।
  • ट्रांसपोंडर रहस्य: वास्तविक जहाजों की संख्या 600 से कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई जहाजों ने हमलों के डर से अपनी लोकेशन छुपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर दिए थे।

शिपिंग संगठनों की चेतावनी: “जल्दबाजी पड़ सकती है भारी”

वैश्विक शिपिंग संगठनों ने चेतावनी दी है कि भले ही रास्ता खुल गया हो, लेकिन सुरक्षा स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक सामान्य आवाजाही में समय लगेगा। यदि सैकड़ों जहाज एक साथ निकलने की कोशिश करेंगे, तो ‘समुद्री जाम’ लग सकता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाएगा। जानकारों का मानना है कि युद्ध से पहले जैसी स्थिति लौटने में कई महीने लग सकते हैं।

news desk

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