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डॉलर कमजोर होते ही सोने-चांदी में भारी ब्लास्ट! MCX पर रेट्स आउट ऑफ कंट्रोल, जानें क्यों मची है लूट?

ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स में आए एक ऐतिहासिक मोड़ ने भारतीय कमोडिटी मार्केट ‘MCX’ के इक्वेशंस को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच अचानक हुए शांति समझौते की खबरों ने जहां दुनिया भर के बाजारों को चौंकाया, वहीं भारतीय सर्राफा बाजार में इसने एक ऐसी ‘सुनामी’ ला दी है जिसकी उम्मीद कम ही लोगों को थी।

सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग में अचानक आई इस जबरदस्त तेजी ने पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

आसमान पर पहुंचे रेट्स


जैसे ही इंटरनेशनल मार्केट से इस डील के सिग्नल मिले, घरेलू वायदा बाजार में खरीदारों की होड़ मच गई। शॉर्ट-कवरिंग और फ्रेश लॉन्ग पोजीशंस के कारण कीमतों में यह बड़ा मूव आया


चांदी में बंपर ब्लास्ट

इंडस्ट्रियल और इन्वेस्टमेंट डिमांड के दम पर MCX पर चांदी की कीमतें 7,200 रुपये प्रति किलोग्राम की एतिहासिक बढ़त के साथ ट्रेड कर रही हैं। इस तेजी ने शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के स्टॉप-लॉस ट्रिगर कर दिए हैं, जिससे खरीदारी और तेज हो गई।


सोना हुआ आउट ऑफ रीच

आम खरीदारों और रिटेलर्स को झटका देते हुए 10 ग्राम सोने का भाव 3,300 रुपये तक उछल गया। शादियों के सीजन से ठीक पहले आई इस तेजी ने ज्वेलर्स और ग्राहकों दोनों को हैरान कर दिया है।

शांति समझौते से सोने-चांदी में आग क्यों लगी?


आमतौर पर यह माना जाता है कि जब दो देशों के बीच तनाव खत्म होता है (Geopolitical Peace), तो सोने-चांदी के दाम गिरते हैं। लेकिन इस बार कहानी बिल्कुल अलग है। इसके पीछे कुछ बड़े फैक्टर्स काम कर रहे हैं:

डॉलर इंडेक्स का धड़ाम होना


अमेरिका-ईरान डील के बाद ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर को लेकर अनसर्टेनटी बढ़ी और डॉलर इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई। इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की प्राइसिंग डॉलर में होती है, इसलिए डॉलर के कमजोर होते ही अन्य करेंसी वाले निवेशकों के लिए सोना-चांदी खरीदना सस्ता और आकर्षक हो जाता है।

सेंट्रल बैंकों की री-स्ट्रेटेजी


दुनिया भर के केंद्रीय बैंक “जैसे RBI, फेडरल रिजर्व” अपनी एसेट्स को डायवर्सिफाई करने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं। इस डील के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इन्फ्लेशन और करेंसी वोलैटिलिटी से बचने के लिए सेंट्रल बैंक अपनी गोल्ड बाइंग को और आक्रामक कर सकते हैं।

अब आगे क्या?


कमोडिटी मार्केट के दिग्गज एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तेजी केवल एक ‘वन-डे वंडर’ नहीं है, बल्कि इसके सेंटीमेंट्स लंबे समय तक टिक सकते हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है की “सोने और चांदी का मीडियम-टर्म ट्रेंड पूरी तरह से बुलिश हो चुका है। हालांकि, इतनी बड़ी रैली के बाद मार्केट में थोड़ा करेक्शन या प्रॉफिट बुकिंग आना स्वाभाविक है। इसलिए रिटेल इनवेस्टर्स को बिल्कुल टॉप पर फोमो का शिकार होकर खरीदारी करने से बचना चाहिए।”

news desk

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