नई दिल्ली: वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे पौधों का विशेष महत्व बताया गया है, जिन्हें घर में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन्हीं में शमी का पौधा भी शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शमी का पौधा भगवान शिव और शनिदेव दोनों से जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि इसकी नियमित पूजा और इससे जुड़े कुछ उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैया के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। मान्यता है कि शनिवार के दिन शमी के पौधे में लाल कलावा बांधने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार शमी का पौधा घर के भीतर लगाने की बजाय बाहर लगाना अधिक शुभ माना जाता है। इसे मुख्य द्वार के पास इस प्रकार रखना चाहिए कि घर से बाहर निकलते समय यह दाईं ओर दिखाई दे। यदि मुख्य द्वार पर पर्याप्त जगह न हो तो इसे छत की उत्तर-पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शनिवार या सोमवार के दिन शमी के पौधे की टहनी पर लाल रंग का कलावा बांधना शुभ माना जाता है। कलावा बांधते समय शनिदेव से परिवार की सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और खुशहाली की प्रार्थना करनी चाहिए। मान्यता है कि इससे शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद शमी के पौधे के पास दीपक जलाकर 11 बार “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है, शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और आय के नए स्रोत बनने लगते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को शमी की पत्तियां अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए जब भी शिव मंदिर जाएं, तो पूजा के दौरान शमी पत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे शिव कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार शमी के पौधे पर लाल कलावा बांधने से कुंडली में राहु की स्थिति मजबूत होने की मान्यता है। कहा जाता है कि इससे राहु के नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है और जीवन में आने वाली कई बाधाएं दूर हो सकती हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार शमी का पौधा लगाने के लिए शनिवार और विजयदशमी का दिन सबसे शुभ माना गया है। मान्यता है कि इन दिनों लगाया गया शमी का पौधा घर में सुख-समृद्धि लाता है और भगवान शिव तथा शनिदेव की विशेष कृपा दिलाने वाला माना जाता है।
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