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ई-सिगरेट आपको कूल नहीं बीमार बना रहा है, पैसों की टेंशन में स्मोकिंग करने वाले सबसे ज्यादा है खतरे में!

यार ये स्मोकिंग से बहुत नुकसान हो रहा है. सोच रहा हूं कि ई-सिगरेट पीना शुरू करूं. सुना है कि उसमें कोई खतरा नहीं होता. इसी सोच के साथ भारत या दुनिया भर में लाखों करोड़ों लोग सिगरेट के खतरों से बचने के लिए ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी वेपिंग को एक ‘सेफ आप्शन’ के तौर पर यूज़ कर रहे हैं. उनका मानना हैं कि ये आदत उन्हें धीरे-धीरे निकोटीन की लत से छुटकारा दिलाने या कम नुकसान पहुंचाने में मदद करेगा.

अगर आप अभी भी ये सोचकर वेपिंग कर रहे हैं कि ये नॉर्मल सिगरेट से ‘कूल’ और ‘सेफ’ है, तो तैयार हो जाइए एक बड़े झटके के लिए. क्योंकि हाल ही हुई एक रिसर्च ने इसके खतरनाक परिणाम बताए हैं. जॉर्जिया यूनिवर्सिटी ने नई रिसर्च के मुताबिक इसे लेकर गंभीर रेड अलर्ट जारी किया है. जिसके मुताबिक ई-सिगरेट यानी वेपिंग या उसे रेगुलर स्मोकिंग के साथ भी वेपिंग की आदत इंसान में डायबिटीज और प्रीडायबिटीज का हाई रिस्क लेवल तक बढ़ा सकती है.

‘मेटाबॉलिज्म’ को भी खतरा

रिसर्चर्स का कहना है की ई-सिगरेट की कहानी अब सिर्फ आपके फेफड़ों तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक, वेपिंग हमारी बॉडी के मेटाबॉलिज्म को साइलेंट मोड पर डैमेज कर रही है, जिसकी वजह से हम खतरनाक बीमारियों खासकर ‘डायबिटीज’ की चपेट में आ रहे हैं.

डबल वॉपिंग-स्मोकिंग यूज़र्स को तगड़ा झटका

जॉर्जिया यूनिवर्सिटी के रिसर्च ने वेपिंग और स्मोकिंग से जुड़े खतरों पर बताया की अगर आप सिर्फ ई-सिगरेट यूज़ करते हैं, तो आपका प्रीडायबिटीज का रिस्क 7% बढ़ जाता है, जो बताता है कि वेपिंगअस्थायी रूप से इंसुलिन के फंक्शन को गड़बड़ा सकती है. सिर्फ नॉर्मल सिगरेट पीने वालों के लिए ये डेंजर 15% तक शूट हो जाता है. लेकिन सबसे शॉकिंग डेटा ड्यूअल यूज़र्स का है. रिसर्च के मुताबिक जो लोग ई-सिगरेट और ट्रेडिशनल सिगरेट दोनों को एक साथ इस्तेमाल करते हैं, उनमें प्रीडायबिटीज का रिस्क सीधे 28% तक पहुंच जाता है. ये साफ सिग्नल है कि इन दोनों प्रोडक्ट्स को मिक्स करना आपकी बॉडी को सुपरफ़ास्ट स्पीड से और सबसे ज़्यादा डैमेज पहुंचा रहा है.

पैसों की टेंशन करने वाले ज़्यादा टारगेट पर?

ये आदत कुछ खास वर्गों के लिए सुपर डेंजरस साबित हो रहा है. रिसर्च ने उन क्रिटिकल फैक्टर्स को रिवील किया है जो आपके रिस्क को कई गुना बढ़ा देते हैं:
जैसे जो लोग ओवरवेट या मोटापे (Obesity) से जूझ रहे हैं और साथ ही स्मोकिंग या वेपिंग कर रहे हैं, उनका स्वास्थ्य सबसे ज़्यादा खराब पाया गया है. और सबसे चौंकाने वाला डेटा ये है कि कम आय वाले ग्रुप्स में ये खतरा 12% से अधिक रिकॉर्ड किया गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आर्थिक तंगी से होने वाले स्ट्रेस को कम करने के लिए अक्सर लोग स्मोकिंग या ड्रिंकिंग का सहारा लेते हैं, जो उन्हें सीधे इस खतरे के घेरे में धकेलता है.

news desk

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