नई दिल्ली: कई लोग सुबह उठने के बाद सिर भारी होने, शरीर में कमजोरी महसूस होने और पर्याप्त नींद लेने के बावजूद थकान की शिकायत करते हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या रातभर सपने देखने की वजह से शरीर और दिमाग थक जाता है? विज्ञान और नींद से जुड़े शोध बताते हैं कि इसकी असली वजह सपने नहीं, बल्कि नींद की गुणवत्ता और उसके दौरान होने वाले व्यवधान होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हर इंसान रात में सपने देखता है, लेकिन सभी लोगों को अपने सपने याद नहीं रहते। ज्यादातर सपने आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट) नींद के दौरान आते हैं। यह चरण कुल नींद का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा होता है।
एक रात में आमतौर पर चार से छह आरईएम चक्र आते हैं और सुबह के समय इनकी अवधि लंबी हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की नींद आरईएम चरण के दौरान या उसके तुरंत बाद खुलती है, तो उसे सपने याद रहने की संभावना अधिक होती है। खासतौर पर भावनात्मक या तनावपूर्ण सपने लंबे समय तक याद रह जाते हैं।
आरईएम नींद के दौरान मस्तिष्क काफी हद तक उसी तरह सक्रिय रहता है, जैसे जागते समय रहता है। हालांकि शरीर की अधिकांश मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति सपनों में हो रही गतिविधियों को वास्तविक जीवन में न दोहरा सके।
इस दौरान भावनाओं को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के हिस्से अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जबकि तार्किक सोच से जुड़े हिस्सों की गतिविधि कम हो जाती है। यही कारण है कि सपने अक्सर वास्तविक और भावनात्मक महसूस होते हैं।
शोध बताते हैं कि आरईएम नींद में आने वाले सपने अक्सर वास्तविक समय के अनुसार ही आगे बढ़ते हैं। यानी यदि कोई सपना 10 मिनट का महसूस हुआ, तो उसकी वास्तविक अवधि भी लगभग उतनी ही हो सकती है।
तनावपूर्ण, रोमांचक या भावनात्मक सपने लंबे और अधिक स्पष्ट लगते हैं। दूसरी ओर सामान्य सपने अक्सर जागने से पहले ही याददाश्त से मिट जाते हैं। जिन लोगों की नींद बार-बार टूटती है, उन्हें सपने अधिक याद रहते हैं और उन्हें लगता है कि उन्होंने पूरी रात सपने ही देखे हैं।
नींद विशेषज्ञों के अनुसार केवल सपने देखने से थकान नहीं होती। शोध बताते हैं कि सामान्य सपने आपकी ऊर्जा को इस हद तक प्रभावित नहीं करते कि सुबह उठते ही आप बेहद थका हुआ महसूस करें।
असल समस्या तब होती है जब नींद बार-बार टूटती है या व्यक्ति आरईएम नींद के दौरान अचानक जाग जाता है। इससे गहरी नींद का समय कम हो जाता है, जो शरीर और मस्तिष्क की रिकवरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
जब गहरी नींद पूरी नहीं हो पाती, तो मस्तिष्क को दिनभर जमा होने वाले रासायनिक पदार्थों को साफ करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। इसके कारण सुबह उठने पर दिमाग पूरी तरह तरोताजा महसूस नहीं करता।
इसके अलावा आरईएम नींद से अचानक जागने पर “स्लीप इनर्शिया” की स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें व्यक्ति कुछ समय तक मानसिक रूप से सुस्त, भ्रमित और थका हुआ महसूस करता है। इसलिए अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि सपनों ने उन्हें थका दिया, जबकि वास्तविक कारण नींद का टूटना होता है।
यदि किसी व्यक्ति की नींद लगातार बाधित होती है, तो शरीर इसकी भरपाई के लिए अगले दिनों में आरईएम नींद की मात्रा बढ़ा देता है। इस प्रक्रिया को “आरईएम रिबाउंड” कहा जाता है।
बार-बार नींद टूटना, अधिकांश सपनों का याद रहना और सुबह लगातार थकान महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को पर्याप्त गहरी नींद नहीं मिल रही है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर इसका असर मानसिक स्वास्थ्य, याददाश्त और दैनिक कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है।
यदि आपको अक्सर ऐसा महसूस होता है कि रातभर सपने आते रहे, सुबह उठने पर कमजोरी बनी रहती है, दिनभर नींद आती है या रात में बार-बार आंख खुल जाती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में नींद संबंधी समस्या की जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
सिनेमा जगत के मशहूर फिल्म निर्माता और सेंसर बोर्ड CBFC के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी…
पश्चिम बंगाल की सियासत में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री और TMC…
TV Actress Shikha Singh Interview फिल्म ऑडिशन के दौरान डायरेक्टर की हरकत से सहम गई…
अफ्रीकी देशों में खतरनाक इबोला वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए उत्तर प्रदेश की…
लखनऊ। दिल्ली के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश में सुरक्षा…
Virat Kohli Injury Update: IPL 2026 के फाइनल में लगी हैमस्ट्रिंग चोट बनी विलेन रिप्लेसमेंट…