नई दिल्ली। साल 2000 का वह समय जब भारतीय क्रिकेट सांसें गिन रहा था। दिग्गज खिलाड़ियों पर फिक्सिंग के आरोप लग रहे थे और प्रशंसकों का भरोसा टूट चुका था।
इसी दौर में 27 साल के सौरव गांगुली को टीम की कमान सौंपी गई। हाल ही में एक पॉडकास्ट में दादा ने खुलासा किया कि कप्तानी संभालने से ठीक पहले उन्होंने सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले को बुलाकर आमने-सामने कुछ गंभीर सवाल किए थे।
सचिन और कुंबले से वो सीधा सवाल
गांगुली ने बताया कि उस समय वे फिक्सिंग की गहराई से अनजान थे। उन्होंने सचिन और राहुल द्रविड़ से सीधे पूछा, “क्या वाकई यह सब होता है? क्या कभी किसी सट्टेबाज ने तुमसे संपर्क करने की कोशिश की?”
गांगुली के अनुसार, उन्होंने सचिन से विशेष रूप से उनके चिर-परिचित अंदाज़ में पूछा था- “तुझे किसी ने पूछा?”
सचिन का जवाब ‘ना’ था। यही सवाल जब उन्होंने दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले से किया, तो उनका जवाब भी ‘नहीं’ में था। इन दिग्गजों की बेदाग छवि ने गांगुली को वो हौसला दिया, जिससे उन्होंने एक नई टीम इंडिया की नींव रखी।
जब कप्तानी के बोझ से कांप रहे थे ‘दादा’
महज 27 साल की उम्र में सचिन और अज़हर जैसे सीनियर खिलाड़ियों को लीड करना गांगुली के लिए आसान नहीं था। कोच्चि में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले वनडे की पूर्व संध्या पर गांगुली काफी नर्वस थे। उन्होंने अपनी पत्नी डोना से कहा था कि, “मैं टीम मीटिंग बहुत छोटी रखूँगा, क्योंकि मैं उन लोगों को निर्देश कैसे दे सकता हूँ जिनके नेतृत्व में मैं खुद खेला हूँ।”
फिक्सिंग की आग से चैंपियंस की टोली तक का सफर
हैंडी क्रोन्ये, मोहम्मद अज़हरुद्दीन और अजय जडेजा के नामों ने क्रिकेट की साख पर जो बट्टा लगाया था, उसे धोना गांगुली की सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन गांगुली की कप्तानी ने भारतीय क्रिकेट का चेहरा बदल दिया:
- 2002: नेटवेस्ट ट्रॉफी की ऐतिहासिक जीत।
- 2003: विश्व कप के फाइनल तक का सफर।
- 2004: पाकिस्तान की धरती पर ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज फतह।
गांगुली ने न केवल मैच जीते, बल्कि उन्होंने युवराज, कैफ, भज्जी और सहवाग जैसे लड़ाकों की वो फौज तैयार की, जिसने भारतीय क्रिकेट को दोबारा जिंदा कर दिया।