नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े आंदोलन के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देना अब देश की प्रांतीय राजनीति में एक नया राजनीतिक बेंचमार्क बन गया है।
केंद्र में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद, अब तीन प्रमुख राज्यों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पंजाब में विपक्ष ने ‘नैतिक जिम्मेदारी’ (Moral Responsibility) का हवाला देकर स्थानीय शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
केंद्रीय स्तर पर सेट हुए इस नए राजनीतिक मानदंड ने राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।
1. आंध्र प्रदेश: जगन मोहन रेड्डी बनाम नारा लोकेश, DSC भर्ती परीक्षा पर रार
आंध्र प्रदेश में YSRCP चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने जिला चयन समिति (DSC) भर्ती परीक्षा में कथित धांधली को लेकर शिक्षा मंत्री नारा लोकेश पर तीखा हमला बोला है:
- जगन का ‘NDA स्टैंडर्ड’ तंज: जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया (‘X’) पर लिखा कि जब नीट मामले में धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा दे सकते हैं, तो क्या मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी एनडीए के इसी मानक का पालन करते हुए अपने बेटे नारा लोकेश का इस्तीफा लेंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थियों की DSC परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
- नारा लोकेश का पलटवार: शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने जगन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “कुछ लोग नैतिक जिम्मेदारी पर भाषण दे रहे हैं, लेकिन उनका अपना पिछला रिकॉर्ड बिल्कुल अलग कहानी बताता है।”
2. तेलंगाना: फीस री-इंबर्समेंट के ₹12,000 करोड़ बकाये पर CM रेवंत रेड्डी निशाने पर
तेलंगाना में शिक्षा विभाग का प्रभार खुद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के पास है। राज्य में बीजेपी (BJP) ने सीएम रेवंत से सीधे शिक्षा मंत्री पद से हटने की मांग की है:
- बीजेपी की मांग: तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ‘ट्यूशन फीस री-इंबर्समेंट योजना’ के तहत 12,000 करोड़ रुपये का बकाया अटका हुआ है, जिससे करीब 20 लाख छात्र प्रभावित हो रहे हैं।
- ‘दोहरा रवैया’: बीजेपी ने 25 जुलाई को हैदराबाद में नीट मुद्दे पर रेवंत रेड्डी द्वारा निकाली गई रैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार अपने ही राज्य के छात्रों का बकाया नहीं चुका सकती, उसे नैतिक रूप से शिक्षा विभाग अपने पास रखने का कोई हक नहीं है।
3. पंजाब: फार्मेसी पेपर लीक पर AAP पर बरसे मनजिंदर सिंह सिरसा
पंजाब में फार्मेसी परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर बीजेपी नेता और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के दोहरे रवैये पर हमला बोला है:
- फार्मेसी परीक्षा लीक का आरोप: सिरसा ने दावा किया कि लाखों रुपये के लेन-देन के बाद फार्मेसी का पेपर लीक हुआ, जिससे 7,000 से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
- मनीष सिसोदिया को याद दिलाया वादा: सिरसा ने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान AAP नेता मनीष सिसोदिया ने कहा था कि अगर उनकी सरकार के तहत पेपर लीक होगा तो संबंधित मंत्री को पद से हटाया जाएगा। लेकिन पंजाब में मामला सामने आने के बाद भी अब तक संबंधित मंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या राज्यों में बनेगा नया राजनीतिक दबाव?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने न केवल केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे को बदला है, बल्कि अब राज्य सरकारों के लिए भी परीक्षा लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आंखें मूंदना मुश्किल कर दिया है। विपक्ष अब हर प्रांतीय गड़बड़ी को केंद्रीय इस्तीफे के उदाहरण से जोड़कर राजनीतिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।