नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान मुरासु दक्षिण भारत के तटीय इलाकों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, 2 और 3 नवंबर की दरम्यानी रात यह आंध्र प्रदेश के ओंगोल के पास तट से टकरा सकता है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है, जो बढ़कर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तूफान को देखते हुए दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लेकिन दिल्ली-NCR के लोगों के लिए सवाल अलग है। क्या मुरासु का असर राजधानी तक पहुंचेगा? क्या इसकी वजह से बारिश होगी और प्रदूषण से राहत मिलेगी? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली-NCR पर इस चक्रवात का सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है। ऐसे में फिलहाल राजधानी को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद भी कम है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 324 तक पहुंच चुका है और हालात को देखते हुए ग्रैप का दूसरा चरण लागू कर दिया गया है।
दिल्ली-NCR की तरफ नहीं बढ़ रहा चक्रवात मुरासु
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, चक्रवात मुरासु बंगाल की खाड़ी से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा। इसके बाद इसकी दिशा उत्तर और उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ने की संभावना है। हालांकि, जमीन से टकराने के बाद तूफान की ताकत लगातार कम होती जाएगी। अनुमान है कि 4 नवंबर की सुबह तक यह कमजोर होकर दबाव के क्षेत्र में बदल सकता है।
मुरासु का संभावित रास्ता मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित रहने वाला है। इसके दिल्ली-NCR तक पहुंचने का कोई पूर्वानुमान नहीं है। तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। इन राज्यों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका भी जताई गई है।
दिल्ली में बारिश होगी या मौसम रहेगा साफ?
राजधानी के मौसम को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग के 2 नवंबर के बुलेटिन में आसमान साफ रहने का अनुमान जताया गया है। 3 और 4 नवंबर को भी दिल्ली में बारिश की संभावना नहीं है। इस दौरान उत्तर-पश्चिम दिशा से हवाएं चल सकती हैं।
दिन के समय हवा की रफ्तार 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि शाम और रात में इसकी गति कम हो सकती है। ऐसे में दक्षिण भारत में तबाही मचाने की ओर बढ़ रहा चक्रवात मुरासु दिल्ली-NCR के मौसम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव करता नजर नहीं आ रहा है।
दिल्ली की हवा 324 AQI के साथ बेहद खराब श्रेणी में
एक तरफ दक्षिण भारत में चक्रवात का खतरा है, तो दूसरी तरफ दिल्ली-NCR के लोग प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। 2 नवंबर को शाम 4 बजे दिल्ली का AQI 324 दर्ज किया गया। इसके साथ ही राजधानी की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई।
लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रैप का दूसरा चरण लागू कर दिया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत संचालित एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के पूर्वानुमान में भी राहत के संकेत नहीं मिले हैं। इसके मुताबिक, 2 से 5 नवंबर तक दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में रह सकती है। इसके बाद अगले छह दिनों तक भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी के बीच रहने की आशंका है।
GRAP-2 लागू, पार्किंग से लेकर सड़कों की सफाई तक बढ़ेंगे उपाय
प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली-NCR में ग्रैप के दूसरे चरण के तहत कई कदम उठाए गए हैं। इनमें सड़कों की मशीनों से सफाई, धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव और सार्वजनिक परिवहन की सेवाओं को बढ़ाना शामिल है।
इसके अलावा निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे निजी गाड़ियों के बजाय मेट्रो और बसों का अधिक इस्तेमाल करें, ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव और उनसे होने वाला प्रदूषण कम किया जा सके।
क्या मुरासु से दिल्ली को प्रदूषण में राहत मिलने की उम्मीद है?
फिलहाल मौसम विभाग के पूर्वानुमान से दिल्ली-NCR के लिए ऐसी कोई राहत नजर नहीं आ रही है। चक्रवात मुरासु का प्रभाव मुख्य रूप से दक्षिण और पूर्व-मध्य भारत के कुछ हिस्सों में रहने की संभावना है। दिल्ली में न तो इसके कारण बारिश होने का अनुमान है और न ही तेज हवाओं का कोई विशेष अलर्ट है।
ऐसे में राजधानी के लोगों को प्रदूषण से तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है। दक्षिण भारत में जहां मुरासु के कारण भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है, वहीं दिल्ली-NCR में खराब हवा लोगों की परेशानी बढ़ाती रह सकती है। यानी एक तरफ चक्रवात का असर दक्षिण भारत में दिखाई देगा, तो दूसरी तरफ राजधानी को फिलहाल प्रदूषण के बीच ही रहना पड़ सकता है।