नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के पहले बड़े प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। देशभर से पहुंचे छात्रों, अभिभावकों और समर्थकों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से सुनाई दी।
जंतर-मंतर पर जुटी हजारों लोगों की भीड़
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के जंतर-मंतर पहुंचते ही प्रदर्शन स्थल पर लोगों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। कुछ ही समय में पूरा क्षेत्र समर्थकों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भर गया। बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी मौजूद रहे जो इस आंदोलन को करीब से देखने और रिकॉर्ड करने पहुंचे थे।
प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि ऑनलाइन अभियान की ताकत पर सवाल उठाने वालों को अब मैदान में उतरी भीड़ ने जवाब दे दिया है।
पेपर लीक बना आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं का मुद्दा रहा। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
राजस्थान से पहुंचे एक अभिभावक ने कहा कि उनके बेटे ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी, लेकिन लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की खबरों ने उसका मनोबल तोड़ दिया। उनका कहना था कि अगर परीक्षा प्रणाली में खामियां हैं तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
देशभर से पहुंचे युवाओं ने जताई नाराजगी
पुणे, राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए युवाओं ने अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की। कई प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह आंदोलन सिर्फ किसी एक परीक्षा या एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव की मांग का प्रतीक है।
अलवर से पहुंचे एक युवा ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उनका मानना है कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
छात्रों के समर्थन में पहुंचे शिक्षक और आम लोग
प्रदर्शन में ऐसे लोग भी शामिल हुए जिनका सीधे तौर पर किसी परीक्षा से संबंध नहीं था। कई शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे।
उत्तर प्रदेश से आए कुछ शिक्षकों ने कहा कि जब परीक्षाओं में गड़बड़ियों की खबरें आती हैं तो छात्रों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो जाता है। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रखना बेहद जरूरी है।
सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा आंदोलन
अब तक मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली सीजेपी के लिए यह प्रदर्शन एक बड़ा सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। पहली बार बड़ी संख्या में समर्थकों को संगठन के नेतृत्व के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिला।
राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा
प्रदर्शन के बाद कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। कुछ विपक्षी नेताओं ने छात्रों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। वहीं कुछ नेताओं ने इसे युवाओं की बढ़ती नाराजगी का संकेत बताया।
जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने यह जरूर दिखाया कि शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर युवाओं के बीच व्यापक असंतोष मौजूद है और यह विषय अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गया है।