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टोक्यो की बादशाहत पर संकट! 70% भूकंप चेतावनी के बाद जापान ने बनाया बड़ा प्लान, अब देश में होंगी दो-दो राजधानियां?

vineet verma
Last updated: August 4, 2026 10:27 am
vineet verma
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टोक्यो: जापान अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में दशकों का सबसे बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। संसद से एक नया कानून पारित होने के बाद देश में दूसरी राजधानी बनाए जाने का रास्ता खुल गया है। यदि यह योजना तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है तो टोक्यो अकेली राजधानी नहीं रहेगा। सरकार के इस कदम के पीछे बड़े भूकंप का खतरा, बढ़ता जनसंख्या दबाव और प्रशासनिक बैकअप तैयार करने की रणनीति को प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

Contents
70% भूकंप आशंका ने बढ़ाई सरकार की चिंतासंसद से कानून पास, ऊपरी सदन में मुश्किल से मिली मंजूरीसिर्फ भूकंप नहीं, टोक्यो पर बढ़ता दबाव भी बड़ी वजहनई राजधानी बनने से अरबों के निवेश की उम्मीददूसरी राजधानी की दौड़ में कौन-कौन से शहर?ओसाका सबसे मजबूत दावेदार, लेकिन खतरा अभी भी बरकरारराजधानी के मुद्दे पर शुरू हुई सियासत

70% भूकंप आशंका ने बढ़ाई सरकार की चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने अगले तीन दशकों के भीतर टोक्यो में सात या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप आने की लगभग 70 प्रतिशत संभावना जताई है। आशंका है कि यदि ऐसा भूकंप आता है तो देश की प्रशासनिक व्यवस्था, प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद और बैंकिंग तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

इसी संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ऐसी दूसरी राजधानी विकसित करना चाहती है, जहां आपात स्थिति में देश का प्रशासन बिना रुकावट संचालित किया जा सके।

संसद से कानून पास, ऊपरी सदन में मुश्किल से मिली मंजूरी

नई राजधानी के प्रस्ताव को संसद के निचले सदन से आसानी से मंजूरी मिल गई, जबकि ऊपरी सदन में यह बेहद मामूली अंतर से पारित हो सका। इस कानून के बाद अब दूसरी राजधानी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

सिर्फ भूकंप नहीं, टोक्यो पर बढ़ता दबाव भी बड़ी वजह

सरकार का मानना है कि टोक्यो पर लगातार बढ़ता जनसंख्या और आर्थिक बोझ भी चिंता का विषय बन चुका है। फिलहाल जापान की करीब 30 प्रतिशत आबादी अकेले टोक्यो में रहती है, जबकि देश की अर्थव्यवस्था का लगभग पांचवां हिस्सा भी इसी शहर से जुड़ा है।

सरकार चाहती है कि विकास और निवेश केवल टोक्यो तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे बड़े शहरों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज हों।

नई राजधानी बनने से अरबों के निवेश की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी राजधानी बनने वाले शहर में बड़े पैमाने पर सरकारी निवेश, बुनियादी ढांचा और निजी पूंजी पहुंचेगी। इससे नए रोजगार पैदा होंगे और क्षेत्रीय विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

दूसरी राजधानी की दौड़ में कौन-कौन से शहर?

नए कानून के मुताबिक दूसरी राजधानी उसी शहर को बनाया जाएगा, जो भूकंप के लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित हो और जहां से राष्ट्रीय प्रशासन प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।

दावेदार शहरों में ओसाका, आईची, नागोया, फुकुओका और सपोरो का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।

ओसाका सबसे मजबूत दावेदार, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार

ओसाका को दूसरी राजधानी की दौड़ में सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि नानकई ट्रफ क्षेत्र में आने वाला बड़ा भूकंप ओसाका के बड़े हिस्से को भी प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि अंतिम निर्णय से पहले सभी संभावित जोखिमों का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

राजधानी के मुद्दे पर शुरू हुई सियासत

सरकार के फैसले ने राजनीतिक बहस भी तेज कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची गठबंधन सहयोगी ‘जापान इनोवेशन पार्टी’ के दबाव में यह फैसला आगे बढ़ा रही हैं। विपक्ष का दावा है कि ओसाका उस पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार है, इसलिए राजधानी की दौड़ में उसे बढ़त दिलाने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि सरकारी मंत्रालयों और अन्य केंद्रीय कार्यालयों को नई राजधानी में कब और किस चरण में स्थानांतरित किया जाएगा। हालांकि इतना स्पष्ट है कि इस फैसले के बाद टोक्यो की दशकों पुरानी एकमात्र राजधानी वाली पहचान पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

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