नई दिल्ली: ट्रेन या फ्लाइट में सफर के दौरान परिवार के सदस्यों को अलग-अलग सीटें मिलना या बुजुर्गों को मनचाही बर्थ नहीं मिलना अक्सर यात्रियों के लिए परेशानी बन जाता है। अब इस समस्या का डिजिटल समाधान निकालने की पहल की गई है। महज 13 साल की छात्रा शिरीन कालरा ने CoSeat नाम का ऐप तैयार किया है, जो यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले ही आपसी सहमति से सीटें बदलने के लिए एक-दूसरे से जोड़ने का काम करेगा।
अब तक यात्रियों को सीट बदलने के लिए ट्रेन में दूसरे यात्रियों से बातचीत करनी पड़ती थी। कई बार इसके लिए डिब्बे में घूमना पड़ता है या टीटीई का इंतजार करना पड़ता है। शिरीन ने इसी परेशानी को समझते हुए एक ऐसा मंच तैयार करने का विचार किया, जहां यात्री पहले से अपनी जरूरत के मुताबिक सीट बदलने की संभावनाएं तलाश सकें।
परिवार को अलग-अलग सीटें मिलने से आया ऐप बनाने का विचार
CoSeat बनाने का विचार शिरीन को अपने परिवार के साथ ट्रेन यात्रा के दौरान आया। परिवार ने टिकट एक साथ बुक किए थे, लेकिन सभी सदस्यों को अलग-अलग सीटें मिली थीं। परिवार को एक साथ बैठाने के लिए उनके पिता दूसरे यात्रियों से सीट बदलने की बात कर रहे थे।
इसी दौरान शिरीन के मन में सवाल आया कि जब टिकट बुक करने से लेकर पीएनआर की जानकारी हासिल करने तक कई काम ऑनलाइन हो सकते हैं, तो सीट बदलने के लिए ट्रेन में किसी अनजान यात्री को तलाशने की जरूरत क्यों होनी चाहिए?
यही सवाल आगे चलकर CoSeat ऐप की अवधारणा बना। शिरीन ने सीट बदलने की इस परेशानी को डिजिटल माध्यम से सुलझाने की दिशा में काम किया।
कैसे काम करेगा CoSeat ऐप?
CoSeat का उद्देश्य यात्रियों को उनकी सीट संबंधी जरूरतों के हिसाब से दूसरे यात्रियों से जोड़ना है। इसके लिए यात्री अपने पीएनआर नंबर के जरिए यात्रा की जानकारी सत्यापित कर सकते हैं और यह बता सकते हैं कि उन्हें किस तरह की सीट चाहिए।
इसके बाद ऐप ऐसे संभावित यात्रियों को तलाशने में मदद करेगा, जिनकी सीट संबंधी जरूरतें आपस में मेल खाती हों और जो सीट बदलने में रुचि रखते हों।
इस प्रक्रिया में सीट बदलने का फैसला पूरी तरह दोनों यात्रियों की सहमति पर निर्भर करेगा। यानी कोई भी यात्री तभी अपनी सीट बदलेगा, जब दूसरा यात्री भी इसके लिए तैयार होगा।
CoSeat रेलवे की टिकट बुकिंग में बदलाव नहीं करता और न ही रेलवे की व्यवस्था को दरकिनार करता है। इसका काम केवल उन यात्रियों को आपस में जोड़ना है, जो अपनी सहमति से सीटों की अदला-बदली करना चाहते हैं।
लोअर बर्थ से लेकर विंडो सीट तक, यात्रियों की जरूरत पर रहेगा ध्यान
CoSeat पर यात्री अपनी यात्रा से जुड़ी अलग-अलग जरूरतें बता सकेंगे। मसलन, किसी परिवार को एक साथ बैठना है, किसी यात्री को लोअर बर्थ चाहिए या फिर कोई विंडो सीट पाना चाहता है।
ऐप ऐसे यात्रियों को संपर्क में लाने की कोशिश करेगा, जिनकी जरूरतें एक-दूसरे के अनुकूल हों। इससे दोनों पक्ष अपनी सुविधा के अनुसार सीट बदलने पर सहमति बना सकते हैं।
हालांकि, सीट बदलने की सुविधा का लाभ तभी मिल सकेगा, जब दूसरे यात्री की जरूरत भी मेल खाए और वह सीट बदलने के लिए राजी हो।
ट्रेन ही नहीं, फ्लाइट में भी सीट बदलने की तैयारी
CoSeat की योजना केवल ट्रेन यात्रियों तक सीमित नहीं है। इस मंच पर फ्लाइट में सीट बदलने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
इसके जरिए यात्री परिवार के साथ बैठने, विंडो सीट पाने या अपनी यात्रा के लिहाज से ज्यादा सुविधाजनक सीट तलाशने जैसी जरूरतों के लिए दूसरे यात्रियों से जुड़ सकेंगे।
इस तरह CoSeat का विचार ट्रेन और हवाई यात्रा, दोनों में सीट बदलने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने की कोशिश करता है।
आम परेशानी से निकला डिजिटल समाधान
CoSeat की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत किसी बड़े कारोबारी विचार से नहीं, बल्कि शिरीन कालरा के अपने परिवार की यात्रा के दौरान सामने आई एक सामान्य परेशानी से हुई।
जिस समस्या को यात्री अक्सर ट्रेन में दूसरे लोगों से बातचीत करके सुलझाने की कोशिश करते हैं, उसी के लिए शिरीन ने डिजिटल मंच बनाने का विचार किया।
पीएनआर के जरिए यात्रा सत्यापित करने, सीट की जरूरत बताने और समान जरूरत वाले यात्रियों को जोड़ने की इसकी अवधारणा का मकसद सीट बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।