देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस एक बार फिर अपने पुराने वैभव और दौर में लौटने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए पहले ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाली थी और इसके बाद से ही वे लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर संगठन को धार दे रहे हैं।
दरअसल, राहुल गांधी की यह पूरी कवायद साल 2029 में होने वाले आगामी लोकसभा चुनाव के लिए एक मजबूत और अभेद्य रणनीति तैयार करने का हिस्सा है।
दूसरी तरफ, यदि ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के मौजूदा समीकरणों को देखें, तो कांग्रेस से अलग राह पकड़ने वाले क्षेत्रीय दलों की सियासी हैसियत पहले के मुकाबले काफी कमजोर हुई है।
आम आदमी पार्टी (AAP) आंतरिक और बाहरी संकटों से जूझ रही है, तो वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का वजूद भी अब खतरे में नजर आ रहा है। विधायकों की खुली बगावत के बाद अब सांसदों का बागी रुख भी ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ा रहा है।
सोशल मीडिया पर अटकलें तेज: क्या बदल जाएगा सियासत का भूगोल?
विपक्षी गठबंधन की बैठकों के बीच सोशल मीडिया पर तैर रही एक खबर ने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। यदि इस खबर में जरा भी सच्चाई है, तो इससे देश की सियासत का पूरा भूगोल बदल सकता है।
पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी नतीजों के बाद ममता बनर्जी का राजनीतिक किला पूरी तरह ढह चुका है और अब उनकी पार्टी के बिखरने का खतरा मंडरा रहा है।
इस बीच, राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर यह कयास तेजी से लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान की ओर से ममता बनर्जी को एक बड़ा और सीधा ऑफर दिया गया है।
इस ऑफर के तहत तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कांग्रेस पार्टी में पूर्ण विलय (Complete Merger) करने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अभी तक दोनों ही पार्टियों की तरफ से कोई भी आधिकारिक या खुला बयान सामने नहीं आया है।
वक्त का तकाजा: पुरानी राह पर लौटेंगी ‘दीदी’?
यदि इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें, तो ममता बनर्जी मूल रूप से कांग्रेस पार्टी का ही हिस्सा थीं। बाद में वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) बनाई थी और पश्चिम बंगाल से कांग्रेस का सफाया कर उसे सीधे तौर पर चुनौती दी थी।
मगर आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समय वक्त का तकाजा यही है कि ममता बनर्जी एक बार फिर कांग्रेस का हिस्सा बन जाएं, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनका राजनीतिक भविष्य और टीएमसी का कुनबा सुरक्षित रह सके।
दिलचस्प बात यह है कि सियासी गलियारों में हलचल सिर्फ ममता बनर्जी तक सीमित नहीं है, बल्कि कई ऐसे अन्य कद्दावर नेता भी हैं जो कभी कांग्रेस का साथ छोड़कर अलग राह पर निकल गए थे, लेकिन अब वे दोबारा कांग्रेस में ‘घर वापसी’ का सुरक्षित रास्ता तलाश रहे हैं।
सियासी गलियारों में मची इस हलचल के बीच पंजाब से एक बड़ी खबर आ रही है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बार फिर कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। दरअसल, कैप्टन पिछले काफी समय से बीजेपी के अंदर खुद को अलग-थलग और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
विशेष रूप से पंजाब बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष ढिल्लन के काम करने के तरीके से कैप्टन काफी नाराज हैं और अपनी यह नाराजगी वे सरेआम भी जाहिर कर चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि ढिल्लन को बीजेपी में लाने वाले खुद कैप्टन ही थे।