इम्पोर्टेन्ट पॉइंट्स
तेहरान/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी भीषण जंग के बाद आखिरकार शांति की उम्मीद जगी है। ‘शांति समझौते’ (Peace Treaty) के तहत दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल व्यापार मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है।
वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। लेकिन क्या इस रास्ते के खुलने से वैश्विक ऊर्जा संकट रातों-रात खत्म हो जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के नीचे बिछा बारूद और ईरान की नई ‘टैक्स नीति’ अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।
यद्यपि डील के तहत होर्मुज को सभी देशों के लिए खोलने का फैसला हुआ है, लेकिन ईरान का रुख कड़ा है। तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इजराइली जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई इजराइली टैंकर इस क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो ईरान उस पर हमला कर सकता है।
भले ही आदेश जारी हो गए हों, लेकिन होर्मुज अभी सुरक्षित नहीं है। युद्ध के दौरान ईरान ने समुद्र के नीचे भारी मात्रा में विस्फोटक (Mines) लगा रखे हैं।
यहाँ डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच विरोधाभास दिख रहा है।
होर्मुज खुलने का सबसे बड़ा विजेता इराक होगा।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में होर्मुज में 600 बड़े कमर्शियल जहाज और तेल टैंकर फंसे हुए हैं।
जिनेवा में 19 जून को होने वाले हस्ताक्षर इस बात की पुष्टि करेंगे कि क्या ईरान अपने वादे पर कायम रहता है। अमेरिकी हमले के विरोध में बंद किया गया यह मार्ग अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए फिर से ‘ऑक्सीजन’ का काम करेगा, बशर्ते सुरक्षा और टैक्स जैसे विवादों को सुलझा लिया जाए।
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