जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेताओं—सौरव दास और आशुतोष रांका—की कस्टडी को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है। एक तरफ SEM (विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट) कोर्ट में पुलिस द्वारा दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई जारी है, तो वहीं दूसरी तरफ दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका वापस लेने और कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों ने देश का सियासी पारा चढ़ा दिया है।
“आप जेन-जी नहीं हैं”: उम्र पर दिल्ली हाई कोर्ट के सवाल और याचिका वापसी
इससे पहले सौरव दास (27 वर्ष) और आशुतोष रांका (31/32 वर्ष) ने SEM कोर्ट द्वारा अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को जब इस मामले पर सुनवाई हुई और वकीलों ने उनकी उम्र बताई, तो न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा, “इसका मतलब है कि आप जेन-जी नहीं हैं।”
कोर्ट ने बॉन्ड उल्लंघन और सीधे हाई कोर्ट आने के औचित्य पर तीखे सवाल खड़े किए, जिसके बाद CJP नेताओं ने हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली। बता दें कि दोनों को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था और 14 अक्टूबर को जेल भेजा गया था, जिसके बाद 19 अक्टूबर को कोर्ट ने उनकी कस्टडी दो दिनों के लिए बढ़ाई थी।
बीजेपी नेता आरपी सिंह का हमला: ‘प्रदर्शन कर रहे हैं तो जिम्मेदारी भी आपकी है‘
दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता आरपी सिंह ने CJP नेताओं पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा:
“कोर्ट ने बहुत स्पष्टता से कहा है कि आप लोग जेन-जी नहीं हैं, आप जेन-जी की उम्र पार कर चुके हैं। कोर्ट की अगली टिप्पणी यह थी कि अगर आप धरना-प्रदर्शन करते हैं तो उसकी जिम्मेदारी भी आपकी ही है। परंतु यहां तो स्थिति यह है कि जब पुलिसकर्मी चेकिंग के लिए आधार कार्ड मांगते हैं, तो धरने में आए लोग उनसे लड़ने लगते हैं कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि अमृतसर में पुलिस ने तीन ऐसे आतंकियों को पकड़ा था जो इस आंदोलन की आड़ में आतंक फैलाने की फिराक में थे।”
कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह का पलटवार
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने CJP के प्रवक्ताओं का बचाव करते हुए केंद्र सरकार और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“अगर देश के युवाओं द्वारा हाथ में तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने पर भी सरकार को आपत्ति होने लगे, तो यह बेहद गंभीर बात है। यह वही सरकार है जो पूरे देश में बात-बात पर तिरंगा यात्रा और तिरंगा मार्च आयोजित करवाती है। आज अगर देश का युवा दिल्ली में तिरंगा लेकर अपनी बात रखना चाहता है, तो उसे रोका जा रहा है और दुखद बात यह है कि कोर्ट भी इस पर अपनी मुहर लगा रहा है। इस प्रकार से यह कहना कि लोकतंत्र को दबाया जा रहा है, कम होगा—यह तो लोकतंत्र को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास है।”
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर कानूनी प्रक्रिया के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। जहां बीजेपी इसे प्रदर्शनकारियों की जिम्मेदारी और कानून के पालन से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे युवाओं की आवाज और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बता रही है। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। इस पूरे विवाद में प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।