Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: क्रिसमस की थाली में कैसे टर्की ने ले ली गूज़ की जगह?  यूरोप में टर्की ऐसे बना डिफॉल्ट डिश
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > फीचर > क्रिसमस की थाली में कैसे टर्की ने ले ली गूज़ की जगह?  यूरोप में टर्की ऐसे बना डिफॉल्ट डिश
फीचर

क्रिसमस की थाली में कैसे टर्की ने ले ली गूज़ की जगह?  यूरोप में टर्की ऐसे बना डिफॉल्ट डिश

news desk
Last updated: December 25, 2025 5:33 pm
news desk
Share
क्रिसमस में टर्की की परंपरा
क्रिसमस में टर्की की परंपरा
SHARE

आज अगर क्रिसमस की बात हो और टर्की का ज़िक्र न आए, तो त्योहार अधूरा सा लगता है। लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। कभी क्रिसमस की दावत में टर्की नहीं, बल्कि गूज़ यानी हंस सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला मांस हुआ करता था। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि 1950 के दशक में सामाजिक, आर्थिक और कृषि से जुड़े कई कारणों की वजह से हुआ।

क्रिसमस पर गूज़ की पुरानी परंपरा

यूरोप, खासकर ब्रिटेन में, सदियों तक क्रिसमस के मौके पर गूज़ पकाने की परंपरा रही। गूज़ अमीरों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों—दोनों के लिए खास मानी जाती थी। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद हालात बदलने लगे। युद्ध के समय और

उसके बाद लंबे समय तक राशनिंग रही, यानी सरकार द्वारा जरूरी चीज़ों की सीमित और नियंत्रित सप्लाई, जिससे लोगों की खाने की आदतें और प्राथमिकताएं धीरे-धीरे बदल गईं।

राशनिंग खत्म हुई तो टर्की ने ली जगह

1950 के दशक में जैसे ही राशनिंग खत्म हुई, लोगों के पास खाने के ज्यादा विकल्प आने लगे। इसी दौरान टर्की ने बाज़ार में एंट्री मारी। टर्की का आकार बड़ा होता है, जिससे ज़्यादा लोगों को खिलाया जा सकता है। इसका स्वाद हल्का होता है और इसे कई तरीकों से पकाया जा सकता है, जो बदलती लाइफस्टाइल और बड़े पारिवारिक समारोहों के हिसाब से ज्यादा सुविधाजनक साबित हुआ।

खेती, बाज़ार और विज्ञापनों का असर

खेती और पोल्ट्री उद्योग में आई आधुनिक तकनीक ने भी टर्की को बढ़ावा दिया। टर्की को बड़े पैमाने पर, कम खर्च में और कम समय में पाला जाने लगा, जबकि गूज़ पालना महंगा और मेहनत भरा काम था। सुपरमार्केट संस्कृति के फैलने से टर्की आसानी से उपलब्ध होने लगा। साथ ही, मीडिया और विज्ञापनों ने टर्की को “परफेक्ट क्रिसमस डिश” के तौर पर पेश किया।

देखते-देखते 1950 के दशक तक टर्की क्रिसमस का डिफॉल्ट मीट बन गया और गूज़ धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमटता चला गया। आज भी कुछ लोग परंपरा निभाने के लिए गूज़ पकाते हैं, लेकिन ज़्यादातर घरों में क्रिसमस की शान बन चुका है—टर्की। यह बदलाव सिर्फ खाने का नहीं, बल्कि बदलते समय, अर्थव्यवस्था और संस्कृति का भी आईना है।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: christmas food tradition, christmas meal history, christmas turkey history, europe christmas dish, festive food culture, goose vs turkey christmas, Indian Press House समाचार, turkey became default dish
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article अनुच्छेद-370 की दीवार गिराने पर बीजेपी को गर्व, राष्ट्र प्रेरणा स्थल के उद्घाटन पर बोले पीएम मोदी, देखें-वीडियो
Next Article विदेशी यात्राओं के दौरान राहुल गांधी की होती है जासूसी? ओवरसीज कांग्रेस चेयरमैन सैम पित्रोदा का बड़ा आरोप

फीचर

View More

यूपी 2027: 86 आरक्षित सीटों पर क्यों टिकी सबकी नजर? 2024 के नतीजों ने बदला दलित वोट का सियासी गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में दलित वोट फिर केंद्र में है। 403 विधानसभा सीटों में 86 सीटें SC-ST के…

By news desk 7 Min Read

लखनऊ के KGMU से जुड़े अध्ययन में मां के दूध के 100 सैंपल में मिले जहरीले रसायन, भारी धातुओं ने बढ़ाई चिंता

लखनऊ। नवजात शिशुओं के लिए अमृत माना जाने वाला मां का दूध…

3 Min Read

26 सितंबर की रात आसमान में दिखेगा खास चांद, जानिए Harvest Moon क्यों कहलाता है फसल का चांद

नई दिल्ली: सितंबर की पूर्णिमा को खास माना जाता है और इसे…

8 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Trending Newsफीचरसियासी

यूपी 2027: 86 आरक्षित सीटों पर क्यों टिकी सबकी नजर? 2024 के नतीजों ने बदला दलित वोट का सियासी गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में दलित वोट फिर केंद्र में है। 403 विधानसभा सीटों में 86 सीटें SC-ST के…

7 Min Read
Trending Newsफीचर

लखनऊ के KGMU से जुड़े अध्ययन में मां के दूध के 100 सैंपल में मिले जहरीले रसायन, भारी धातुओं ने बढ़ाई चिंता

लखनऊ। नवजात शिशुओं के लिए अमृत माना जाने वाला मां का दूध अब पर्यावरण प्रदूषण और दूषित खान-पान के कारण…

3 Min Read
फीचर

26 सितंबर की रात आसमान में दिखेगा खास चांद, जानिए Harvest Moon क्यों कहलाता है फसल का चांद

नई दिल्ली: सितंबर की पूर्णिमा को खास माना जाता है और इसे Harvest Moon यानी फसल का चांद कहा जाता…

8 Min Read
Trending Newsफीचर

टीएन शेषन: जब चुनाव आयोग के फैसलों से बदल गया चुनावी अनुशासन, बूथ कैप्चरिंग से आचार संहिता तक ऐसे दिखाई सख्ती

नई दिल्ली। भारतीय चुनाव व्यवस्था में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनका जिक्र चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी सुधारों की…

8 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?