40 की उम्र में खानपान सुधारें, बुढ़ापे में दिमाग रहेगा तेज
मस्तिष्क की सेहत को लेकर अक्सर यह माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होना स्वाभाविक है, लेकिन नई रिसर्च बता रही है कि बुढ़ापे में दिमाग कितना सक्रिय रहेगा, इसकी नींव काफी पहले यानी मध्यम आयु में ही पड़ने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होना आम बात मानी जाती है, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि बुढ़ापे में दिमाग कितना तेज रहेगा, इसकी शुरुआत 40 से 50 साल की उम्र में अपनाई गई खानपान की आदतों से ही हो जाती है। JAMA Neurology में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में सामने आया है कि इस उम्र में अच्छा और संतुलित भोजन करने वाले लोगों में आगे चलकर भूलने की समस्या कम देखी गई।
करीब डेढ़ लाख लोगों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अपने खाने में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और मछली जैसी चीजें शामिल करते हैं, उनकी याद रखने और सोचने की क्षमता लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है। ऐसे लोगों में उम्र बढ़ने के साथ दिमागी कमजोरी का खतरा भी कम देखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार 45 से 54 साल की उम्र दिमाग की सेहत के लिए बहुत अहम मानी जाती है। इसी समय शरीर में कुछ ऐसी समस्याएं धीरे-धीरे शुरू होती हैं जो बाद में दिमाग पर असर डाल सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस उम्र में बढ़ता ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर का असंतुलन, शरीर में सूजन और ब्लड फ्लो से जुड़ी दिक्कतें दिमाग की क्षमता को प्रभावित करने लगती हैं।
मध्यम उम्र में दिमाग पर अच्छी आदतों का असर जल्दी पड़ता है। अगर इस समय खानपान सुधारा जाए और जीवनशैली संतुलित रखी जाए, तो आगे चलकर भूलने की बीमारी का खतरा कम किया जा सकता है।
अध्ययन में DASH diet (Dietary Approaches to Stop Hypertension) को खास तौर पर फायदेमंद बताया गया है। इस डाइट में नमक कम लिया जाता है और फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज ज्यादा शामिल किए जाते हैं। यह दिल के साथ-साथ दिमाग के लिए भी अच्छी मानी जा रही है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार फल, सब्जियां, मेवे, बीज, जैतून का तेल और मछली जैसे भोजन दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। वहीं लाल मांस, बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय और ज्यादा तली-भुनी चीजों से दूरी रखना बेहतर है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही भोजन सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग को भी लंबे समय तक सक्रिय रखने में मदद करता है।
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