अमेरिका ने रूस के खिलाफ एक बार फिर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपना लिया है। अमेरिकी सीनेट ने एक ऐसा कड़ा रिस्ट्रिक्शन बिल पास किया है, इस नए प्रस्ताव के तहत, रूस से ऊर्जा का आयात करने वाले देशों पर 100% तक भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है, जिससे वैश्विक राजनीति और व्यापारिक बाजार में हलचल तेज हो गई है।
क्या है ‘लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट’?
लिंडसे ओ. ग्राहम अमेरिका में सीनेट के मुखर और कड़े रुख वाले नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने साल 2003 से जुलाई 2026 तक अमेरिकी सीनेट में दक्षिण कैरोलिना राज्य का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद अगस्त 2026 में अमेरिकी सीनेट ने एक बड़ा प्रतिबंध विधेयक पारित किया, जिसका नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ रखा गया। इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट ने 86-11 वोटों से मंजूरी दी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
यह अमेरिकी विधेयक रूस और ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने और यूक्रेन युद्ध के फंडिंग को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। इस बिल के माध्यम से अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकता है। साथ ही, इसके जरिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तेल और गैस निर्यात से होने वाली आय को प्रभावित करने और उनकी “वॉर मशीन” को कमजोर करने की कोशिश की जा सकती है
भारत ने कितनी मात्रा में खरीदा तेल?
पिछले कुछ महीनों से रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। रिपोर्ट्स की मुताबिक, भारत ने रूस से रिकॉर्ड 2.8 मिलियन लगभग 28 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है, जो देश के कुल तेल आयात का लगभग 55% है। साल 2026 में अब तक रूस ने अकेले भारत को यूएई (UAE) और सऊदी अरब जैसे देशों के कुल निर्यात से भी ज्यादा कच्चे तेल की सप्लाई की है।
हालांकि, अभी यह बिल कानून नहीं बना है। सीनेट से पास होने के बाद अब इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। यदि वहां यह बिल पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बन सकेगा।