नई दिल्ली: नया महंगा iPhone बाजार में आते ही उसकी कीमत और फीचर्स को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है। कुछ प्रीमियम मॉडल की कीमत करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ फोन के कैमरे, डिजाइन या तकनीक का नहीं है। असली सवाल यह है कि 3 लाख रुपये की रकम कितनी बड़ी है और इसी पैसे को दूसरी जरूरतों में लगाया जाए तो उससे कितना कुछ हासिल किया जा सकता है।
भारत में 2025-26 के लिए प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय यानी प्रति व्यक्ति एनएनआई 2,08,090 रुपये अनुमानित है। यह आंकड़ा किसी व्यक्ति की वास्तविक कमाई नहीं बताता, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति को समझने वाला औसत संकेतक है।
अब इसी आंकड़े के मुकाबले 3 लाख रुपये को देखें। एक महंगे स्मार्टफोन पर खर्च होने वाली यह रकम 2025-26 की अनुमानित प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय से भी ज्यादा है। यहीं से महंगे फोन की कीमत को देखने का नजरिया बदल जाता है।
बात सिर्फ इतनी नहीं रह जाती कि कोई व्यक्ति इतना महंगा फोन खरीद सकता है या नहीं। सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी रकम को किस तरह खर्च किया जाए, ताकि उसका फायदा लंबे समय तक व्यक्ति, परिवार या समाज को मिल सके।
करीब 3 लाख रुपये में किसी परिवार के लिए कई जरूरी घरेलू सामान खरीदे जा सकते हैं। एयर कंडीशनर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव और बड़ा टीवी जैसे उपकरण इस बजट में अलग-अलग संयोजन के साथ लिए जा सकते हैं।
यानी एक ही रकम जहां किसी के लिए सिर्फ एक प्रीमियम डिवाइस बन सकती है, वहीं किसी दूसरे परिवार के लिए घर की कई बुनियादी सुविधाओं में बदल सकती है। फर्क सिर्फ सामान की संख्या का नहीं, बल्कि खर्च के उद्देश्य का भी है।
डिजिटल दौर में वीडियो, फोटोग्राफी और दूसरे कंटेंट से करियर बनाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है। ऐसे में 3 लाख रुपये को केवल एक महंगे फोन पर खर्च करने के बजाय कैमरा, लेंस, माइक्रोफोन, रोशनी, ट्राइपॉड और अन्य जरूरी उपकरणों में लगाया जा सकता है।
इस तरह शुरुआती स्तर का एक छोटा स्टूडियो तैयार किया जा सकता है। यहां खर्च का इस्तेमाल सिर्फ किसी महंगी वस्तु के मालिक बनने के लिए नहीं, बल्कि काम शुरू करने और भविष्य में कमाई की क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है।
स्वास्थ्य के मामले में इतनी बड़ी रकम का महत्व और स्पष्ट हो जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2021-22 के अनुसार, परिवारों ने अपनी जेब से स्वास्थ्य सेवाओं पर कुल 3.56 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह प्रति व्यक्ति करीब 2,600 रुपये बैठता है। इस खर्च में दवाइयों और इलाज से जुड़े खर्च की बड़ी हिस्सेदारी रही है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि 3 लाख रुपये हर गंभीर बीमारी का पूरा इलाज करा सकते हैं। बीमारी, अस्पताल और उपचार के हिसाब से खर्च अलग-अलग होता है। लेकिन किसी जरूरतमंद परिवार के लिए यही रकम इलाज, दवाइयों, जांच या अस्पताल के खर्च में बड़ी राहत जरूर दे सकती है।
यही तुलना महंगे स्मार्टफोन की कीमत को एक अलग नजरिए से देखने को मजबूर करती है।
शिक्षा के लिहाज से भी 3 लाख रुपये छोटी रकम नहीं है। सरकारी सर्वेक्षणों में शिक्षा पर होने वाले खर्च में फीस के अलावा किताबें, स्टेशनरी, ट्यूशन और दूसरी शैक्षणिक जरूरतें शामिल की जाती हैं।
2017-18 के सरकारी शिक्षा संबंधी सर्वेक्षण में सामान्य शिक्षा के प्रति विद्यार्थी औसत खर्च में फीस की हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत बताई गई थी। इसी दौरान माध्यमिक स्तर पर सामान्य पाठ्यक्रम का औसत खर्च करीब 9 हजार रुपये और उच्च माध्यमिक स्तर पर करीब 13,845 रुपये दर्ज किया गया था। हालांकि, ये आंकड़े पुराने हैं और मौजूदा समय की फीस का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं करते।
यूडीआईएसई+ 2024-25 के मुताबिक देश में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर 11.5 प्रतिशत रही। ऐसे में जरूरतमंद छात्र के लिए 3 लाख रुपये फीस के अलावा किताबों, परीक्षा शुल्क, आने-जाने, डिजिटल उपकरण और आगे की पढ़ाई जारी रखने में भी मददगार हो सकते हैं।
3 लाख रुपये की तुलना जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के संदर्भ में करते समय सावधानी जरूरी है। यह कहना सही नहीं होगा कि 3 लाख रुपये देकर किसी भी अंडरट्रायल को जमानत मिल सकती है। जमानत अदालत के आदेश और संबंधित मामले की कानूनी स्थिति पर निर्भर करती है।
हालांकि, जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या बड़ी है। जेल सांख्यिकी भारत 2023 के अनुसार, 31 दिसंबर 2023 तक देश की जेलों में 3,89,910 अंडरट्रायल कैदी थे। इनमें उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 73,491 विचाराधीन कैदी दर्ज किए गए।
जरूरतमंद कैदियों के लिए सरकार की ओर से आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी है। इसमें जमानत या जुर्माने के भुगतान जैसी जरूरतों में मदद का प्रावधान शामिल है और इसके लिए जिला स्तर पर मामलों का आकलन किया जाता है।
इसलिए यहां 3 लाख रुपये का उदाहरण किसी जमानत की निश्चित कीमत बताने के लिए नहीं, बल्कि यह समझाने के लिए है कि इतनी रकम किसी जरूरतमंद व्यक्ति की कानूनी परेशानी में कितनी अहम सहायता बन सकती है।
3 लाख रुपये को किसी छोटे कारोबार, जरूरी उपकरण, प्रशिक्षण या आय पैदा करने वाले साधन में लगाने पर इसका असर सिर्फ तत्काल खर्च तक सीमित नहीं रह सकता। वीडियो में ई-रिक्शा और पशुपालन जैसे विकल्पों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इनसे होने वाली कमाई तय नहीं होती। वास्तविक आय स्थान, बाजार, रखरखाव, काम के तरीके और जोखिम जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए इन्हें निश्चित कमाई के विकल्प के बजाय इस बात के उदाहरण के तौर पर देखना चाहिए कि पैसा खर्च करने के साथ-साथ कमाई पैदा करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह तुलना किसी iPhone या दूसरे महंगे स्मार्टफोन के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों की आमदनी और बचत पर्याप्त है, उनके लिए प्रीमियम फोन खरीदना व्यक्तिगत पसंद का मामला है।
दिक्कत तब शुरू होती है जब महंगा फोन सामाजिक दबाव, दोस्तों के बीच होड़, सोशल मीडिया पर दिखावे या नए मॉडल के आकर्षण में आर्थिक क्षमता से ज्यादा खर्च करवा दे। कई बार लोग अपनी बचत खत्म कर देते हैं या फोन खरीदने के लिए किस्तों का सहारा लेते हैं।
ऐसे में सवाल फोन महंगा है या सस्ता, इससे आगे बढ़कर वित्तीय प्राथमिकता का हो जाता है।
कल्पना कीजिए कि यही 3 लाख रुपये किसी छात्र की पढ़ाई में लगते हैं, किसी परिवार के इलाज में मदद करते हैं, किसी युवा को काम शुरू करने का साधन देते हैं, किसी घर के खर्च को कम करने में मदद करते हैं या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को कानूनी सहायता तक पहुंचने का जरिया बनते हैं।
तब वही रकम सिर्फ एक वस्तु की कीमत नहीं रह जाती। वह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अवसर या आर्थिक सुरक्षा में बदल सकती है।
महंगा फोन खरीदना सही है या गलत, इसका कोई एक जवाब नहीं हो सकता। लेकिन 3 लाख रुपये खर्च करने से पहले इतना जरूर सोचा जा सकता है कि इस रकम से सिर्फ एक बेहतर फोन मिलेगा या जिंदगी में कोई बड़ा और लंबे समय तक रहने वाला बदलाव भी आएगा।
तकनीक कुछ वर्षों बाद पुरानी हो सकती है, लेकिन शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, कारोबार और बचत में लगाया गया पैसा लंबे समय तक असर डाल सकता है। इसलिए 3 लाख रुपये की असली कीमत सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि उससे क्या खरीदा गया, बल्कि इससे भी तय होती है कि उस रकम ने आगे कितनी उपयोगिता पैदा की।
रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच सऊदी अरब ने अपनी अहम ईस्ट-वेस्ट…
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। हर…
नई दिल्ली: भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में देवताओं का शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला…
नई दिल्ली: iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max खरीदने का इंतजार कर रहे…
नई दिल्ली: राजस्थान में हुए निकाय चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 19 सीटों…
नई दिल्ली: यूपीआई भुगतान को लेकर चल रही शुल्क लगने की अटकलों के बीच सरकार…