चुनावी माहौल में बिहार की सियासत गंभीर आरोपों की आंच से पूरी तरह सुलग रही है. आरोप बीजेपी और जेडीयू के नेताओं पर लगा है. आरोप लगाने वाले जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर हैं. लेकिन मामला तब गंभीर होने लगा जब इस मामले में बीजेपी के ही बड़े नेताओं ने अपना बयान दिया.
पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह का बयान बिहार का सियासी तापमान तो बढ़ा ही रहा है बीजेपी के अंदर भी हलचल बढ़ा गया. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पर पीके द्वारा लगाए गए आरोपों पर आरके सिंह ने साफ कहा कि ‘प्रशांत किशोर के आरोपों पर उन्हे सार्वजनिक जवाब देना चाहिए, यदि जवाब नहीं है तो उन्हे इस्तीफा दे देना चाहिए’ इसके अलावा आरके सिंह ने सम्राट चौधरी के डिग्री विवाद पर कहा कि ‘प्रशांत किशोर कह रहे हैं कि सम्राट चौधरी 7वीं पास हैं इसलिए उन्हे अपनी 10वीं यानी मैट्रिक की डिग्री दिखानी चाहिए’.
आरके सिंह के बयान के बाद ये चर्चा हो रही है कि क्या पीके के आरोपों को लेकर पार्टी में ही नेताओं की दो राय बन रही है.
पीके ने सार्वजनिक मंचों से लेकर सोशल मीडिया तक, सम्राट चौधरी और दिलीप जायसवाल को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं. ऐसे में आरके सिंह के तेवर ने पार्टी के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है.
आरके सिंह पहले नेता नहीं है जिन्होने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर बयान दिया हो. इससे पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री और बिहार के सारण सीट से लोकसभा सांसद राजीव प्रताप रूडी भी निशिकांत दुबे को लेकर बयान दिया था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी.
पहले रूडी और अब आरके सिंह, इन दोनों नेताओं के बयान को बिहार की राजपूत लॉबी से भी जोड़ कर देखा जा रहा है. राजीव प्रताप रूडी ने कुछ दिन पहले दिए अपने बयान में कहा था कि ‘बिहार की लगभग 70 विधानसभा सीटों पर राजपूत समाज निर्णायक भूमिका निभाता है’.
माना जा रहा है कि उन्होंने यह संदेश पार्टी के हाईकमान को देने की कोशिश की है कि चुनावी रणनीति तय करते समय राजपूत समाज की अनदेखी करना भाजपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है. चर्चा ये भी है कि रूडी इशारों इशारों में सीएम पद के लिए अपनी दावेदारी भी पेश कर रहे हैं. और यही चर्चा आरके सिंह को भी लेकर है कि वो अब नई भूमिका की तलाश में हैं.
कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आरके सिंह और रूडी का रूख एनडीए के साथ साथ बीजेपी की मुश्किलें बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. साथ ही बिहार के सियासत को दिलचस्प भी बना रहा है.