बिहार चुनाव 2025 बीजेपी बागी नेता
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी के बीच एनडीए गठबंधन के भीतर बगावत की लहर अब खुलकर सामने आ गई है. टिकट बंटवारे के बाद कई नेताओं में असंतोष उभरकर सामने आ रहा है. जेडीयू के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में भी असंतोष चरम पर है. पार्टी ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए छह बागी नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया. इनमें सबसे चर्चित नाम कहलगांव के मौजूदा विधायक पवन यादव का है, जिन्हें इस बार टिकट नहीं मिला और उन्होंने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है.
भाजपा प्रदेश मुख्यालय प्रभारी अरविंद शर्मा द्वारा जारी निष्कासन पत्र में कहा गया है कि ये सभी नेता गठबंधन प्रत्याशियों के खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रहे थे, जो पार्टी अनुशासन के विपरीत है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने बताया कि इन नेताओं की गतिविधियों की शिकायतें कई महीनों से मिल रही थीं. जांच के बाद पार्टी ने इन्हें छह साल के लिए निष्कासित करने का निर्णय लिया. जिन अन्य नेताओं को पार्टी से निकाला गया है उनमें सनी यादव, श्रवण कुशवाहा, उत्तम चौधरी, मारुति नंदन मारुति और पवन चौधरी शामिल हैं.
कहलगांव में पवन यादव की बगावत ने बढ़ाई चुनावी गर्मी
कहलगांव विधानसभा सीट इस समय बिहार के चुनावी मानचित्र का सबसे चर्चित केंद्र बन गई है. इस क्षेत्र में यादव (25%), EBC (20%) और OBC (30%) मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. 2020 के चुनाव में पवन यादव ने 56% वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी. इस बार सीट जेडीयू को मिलने से वह नाराज़ हो गए और निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवन यादव की स्थानीय पकड़ और लोकप्रियता के कारण NDA को 10 से 15% वोटों का नुकसान हो सकता है.
पवन यादव का प्रभाव सिर्फ कहलगांव तक सीमित नहीं है. भागलपुर और मुंगेर जिले के आस-पास के इलाकों में भी वे “स्थानीय हितैषी नेता” के रूप में जाने जाते हैं. बाढ़ राहत कार्यों, किसानों की समस्याओं और छोटे व्यापारियों के हक में आवाज उठाने की वजह से उन्होंने मजबूत जनाधार तैयार किया है. यही वजह है कि उनके निर्दलीय मैदान में उतरने से महागठबंधन को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है.
जेडीयू में भी बगावत, NDA की मुश्किलें बढ़ीं
उधर, जेडीयू ने भी हाल ही में अपने 16 बागी नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है, जिनमें गोपाल मंडल जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. यह साफ संकेत है कि NDA में टिकट वितरण और नेतृत्व को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। बीजेपी और जेडीयू दोनों दल अपने-अपने बागियों पर सख्त कार्रवाई कर नुकसान कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि चुनाव के इस माहौल में ये बगावतें गठबंधन के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती हैं.
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार, NDA के लिए खतरे की घंटी
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कहलगांव सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है — NDA, महागठबंधन और निर्दलीय पवन यादव के बीच. यादव और EBC वोटों का बंटवारा NDA के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है. दूसरी ओर, महागठबंधन के उम्मीदवार को इस वोट बैंक से सीधा लाभ मिलने की संभावना है.
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बिहार की राजनीति में टिकट न मिलने की नाराजगी से उपजे बागी नेता कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ रहे हैं. एनडीए के भीतर यह असंतोष अगर नहीं थमा, तो कहलगांव जैसी सीटें पूरे बिहार में NDA के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं.
एनडीए की मुश्किलें अब केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि भितरघात की आग अब उसके अपने घर में भड़क उठी है. बीजेपी और जेडीयू दोनों के भीतर हो रही बगावत यह संकेत देती है कि बिहार का यह चुनाव न केवल विपक्षी दलों के बीच, बल्कि साथी दलों के भीतर भी संघर्ष का मैदान बनने जा रहा है.
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