अयोध्या / नई दिल्ली। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तूल पकड़ लिया है। इस पूरे विवाद पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान सामने आया है। आलोक कुमार ने सीधे तौर पर कहा है कि मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ‘लापरवाही के दोषी’ हो सकते हैं।
इस बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर अंदरूनी कलह और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद से ही इस मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं।
‘वीएचपी जिम्मेदार नहीं, चंपत राय पर जांच के बाद एक्शन’
एक मीडिया इंटरव्यू में आलोक कुमार ने साफ किया कि दान चोरी की इस घटना से दुनियाभर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था और भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए विश्व हिंदू परिषद जिम्मेदार नहीं है।
“सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही वीएचपी का काम पूरा हो चुका था। राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। चंपत राय को ट्रस्ट में वीएचपी की तरफ से शामिल नहीं किया गया था।”
आलोक कुमार, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, VHP
चंपत राय को बर्खास्त करने की मांगों पर उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच की शुरुआत के बाद चंपत राय ने पहले ही महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। आरोप सीधे तौर पर उनके ड्राइवर पर हैं, न कि राय पर। लेकिन आलोक कुमार ने यह भी माना कि चंपत राय से निगरानी में लापरवाही जरूर हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही उन पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
जनता का भरोसा जीतने के लिए VHP की 4 बड़ी मांगें
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर एक पोस्टर साझा करते हुए मंदिर ट्रस्ट में कथित गड़बड़ियों को दूर करने और जनता का विश्वास दोबारा बहाल करने के लिए 4 सूत्रीय मांगें रखी हैं:
- तत्काल एफआईआर (FIR): कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए मामले में तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए।
- फास्ट-ट्रैक जांच: मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच में तेजी लाई जाए।
- रोजाना सुनवाई (Daily Hearing): मामले की त्वरित सुनवाई के लिए इसे फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भेजा जाए ताकि समय पर न्याय मिल सके।
- दोषियों को सख्त सजा: आस्था के केंद्र में सेंध लगाने वाले अपराधियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
यूपी सरकार की SIT जांच और ट्रस्ट का रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। एसआईटी इस समय निम्नलिखित बिंदुओं पर गहराई से तफ्तीश कर रही है:
- दान के पैसों का पूरा हिसाब-किताब।
- मंदिर से जुड़े जमीन के लेन-देन।
- गायब हुए कीमती सामान और आभूषण।
- सुरक्षा और प्रक्रिया में हुई बड़ी खामियां।
SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। वहीं दूसरी ओर, राम मंदिर ट्रस्ट ने किसी भी तरह की बड़ी वित्तीय गड़बड़ी या घोटाले के दावों से साफ इनकार किया है।