नई दिल्ली: अगर आप यह मानते हैं कि केवल चीनी, मिठाई या जंक फूड खाने से ही डायबिटीज का खतरा बढ़ता है, तो नई रिसर्च आपकी सोच बदल सकती है। एक अध्ययन में सामने आया है कि भारत में टाइप-2 डायबिटीज बढ़ने के प्रमुख खानपान संबंधी कारणों में पर्याप्त मात्रा में फल न खाना भी शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि फलों का कम सेवन शरीर को जरूरी पोषक तत्वों से वंचित कर देता है, जिससे बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।
यह अध्ययन Diabetes Research and Clinical Nutrition जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें Global Burden of Disease Study 2023 के आधार पर एशिया के 34 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में खानपान से जुड़े जोखिमों के कारण एशिया में टाइप-2 डायबिटीज से करीब 2.15 लाख लोगों की मौत हुई, जबकि लगभग 1 करोड़ DALYs (बीमारी और समय से पहले मौत का बोझ) दर्ज किए गए।
अध्ययन में पाया गया कि फलों का कम सेवन सबसे बड़ा आहार संबंधी जोखिम बनकर सामने आया। इसकी वजह से एशिया में करीब 86 हजार मौतें और 36 लाख DALYs दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत और दक्षिण एशिया की स्थिति कई अन्य एशियाई देशों से अलग है। जहां कुछ देशों में लाल और प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन बड़ा कारण है, वहीं भारत में पर्याप्त फल और साबुत अनाज न खाना टाइप-2 डायबिटीज के बढ़ते मामलों की प्रमुख वजह माना गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज की स्थिति में हैं। ICMR-INDIAB और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अपनी कुल कैलोरी का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त करते हैं। इनमें सफेद चावल और रिफाइंड अनाज की मात्रा अधिक होती है, जबकि फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन का सेवन अपेक्षाकृत कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग फलों में मौजूद प्राकृतिक मिठास की वजह से उन्हें खाने से बचते हैं, जबकि फल फाइबर, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ये ब्लड शुगर को संतुलित रखने और शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. वी. मोहन के अनुसार, भारत में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, कम फाइबर और कम प्रोटीन वाला भोजन डायबिटीज का प्रमुख कारण बन रहा है। उनका कहना है कि साबुत अनाज, फल और मूंगफली, सरसों व ऑलिव ऑयल जैसी स्वस्थ वसा को आहार में शामिल करना लाभदायक हो सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि डायबिटीज की रोकथाम के लिए केवल चीनी कम करना पर्याप्त नहीं है। रोजमर्रा के भोजन में मौसमी फल, साबुत अनाज, हरी सब्जियां और अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन शामिल करने से टाइप-2 डायबिटीज के बढ़ते खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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