नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 15 जुलाई 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रातः 11 बजकर 50 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। दिनभर बनने वाले शुभ योग और नक्षत्र के कारण पूजा-पाठ, आध्यात्मिक साधना और कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जा रहा है। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति।
आज आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि सुबह 11 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। रात 9 बजकर 46 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद अश्लेषा नक्षत्र का प्रारंभ होगा।
आज सुबह 8 बजकर 4 मिनट तक हर्षण योग रहेगा। इसके बाद वज्र योग का निर्माण होगा, जो 16 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक प्रभावी रहेगा। आज का दिनमान 13 घंटे 47 मिनट 49 सेकंड का रहेगा। सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में गोचर करेंगे।
15 जुलाई 2026 को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 33 मिनट पर हुआ। सूर्यास्त शाम 7 बजकर 21 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर और चंद्रास्त रात 8 बजकर 19 मिनट पर रहेगा। आज मध्याह्न का समय दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर होगा।
आज अभिजित मुहूर्त का संयोग नहीं बन रहा है।
आज प्रविष्टे अथवा गते मान 31 रहेगा। आषाढ़ मास का अमान्त और पूर्णिमान्त दोनों स्वरूप प्रभावी हैं। शक संवत 1948 पराभव (रौद्र) और विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थी चल रहा है।
वर्तमान संवत्सर में राजा देवगुरु बृहस्पति, सेनाधिपति चंद्रमा, मंत्री मंगल और धान्याधिपति बुध हैं। आज सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में मिथुन राशि में गोचर करेंगे, जबकि चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से कर्क राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इससे मानसिक शांति और संवेदनशीलता में वृद्धि हो सकती है।
बुधवार होने के कारण आज उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। यदि इस दिशा में यात्रा करना आवश्यक हो तो घर से निकलने से पहले भगवान गणेश की आराधना करें, थोड़ा धनिया या तिल ग्रहण करें तथा बड़ों का आशीर्वाद लेकर यात्रा शुरू करें।
आज सुबह 11 बजकर 50 मिनट तक भगवान शिव का निवास श्मशान में माना गया है। इसके बाद शिववास माता गौरी के साथ रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह 11:50 बजे तक रुद्राभिषेक जैसे विशेष अनुष्ठानों को टालना उचित माना जाता है, जबकि इसके बाद का समय अधिक अनुकूल रहेगा।
अग्निवास भी सुबह 11 बजकर 50 मिनट तक पाताल में रहेगा और इसके बाद पृथ्वी पर माना जाएगा। इसलिए हवन और अग्नि से जुड़े धार्मिक कार्य दोपहर के बाद करना अधिक शुभ माना गया है।
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