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Cheque Bounce से बचना है तो पहले जान लें ये नियम, एक गलती पड़ सकती है भारी; जुर्माने से लेकर कोर्ट केस तक बढ़ सकती है बात

नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान के दौर में भी बड़े लेनदेन, कारोबार, किराया और कई अन्य वित्तीय कामों में चेक का इस्तेमाल आज भी व्यापक रूप से किया जाता है। लेकिन अगर बैंक में जमा करने के बाद चेक क्लियर नहीं होता और वापस लौट आता है, तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है। कई मामलों में यह सिर्फ बैंकिंग प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कानूनी विवाद की वजह भी बन सकता है। ऐसे में चेक जारी करने से पहले इससे जुड़े नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

किन वजहों से बाउंस हो सकता है चेक?

चेक बाउंस होने की सबसे आम वजह खाते में पर्याप्त राशि का न होना है। इसके अलावा गलत हस्ताक्षर, तारीख में त्रुटि, ओवरराइटिंग, शब्दों और अंकों में अलग-अलग राशि लिखना, फटा हुआ चेक, पोस्ट-डेटेड चेक को तय तारीख से पहले जमा करना, तीन महीने से अधिक पुराना चेक प्रस्तुत करना या बंद अथवा फ्रीज खाते का चेक भी अस्वीकृत हो सकता है।

क्या हर चेक बाउंस पर बनता है कानूनी मामला?

हर बार चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती। यदि चेक तकनीकी कारणों, जैसे गलत हस्ताक्षर, तारीख या अन्य त्रुटियों के कारण वापस लौटता है, तो उसे सुधारकर दोबारा जारी किया जा सकता है। लेकिन यदि चेक किसी कर्ज या देनदारी के भुगतान के लिए दिया गया था और खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हुआ है, तो मामला कानूनी रूप ले सकता है।

चेक बाउंस होने पर कितना लगता है चार्ज?

चेक बाउंस होने पर बैंक चेक जारी करने वाले खाते से जुर्माना या सेवा शुल्क वसूलता है। यह शुल्क सभी बैंकों में समान नहीं होता और प्रत्येक बैंक अपने नियमों के अनुसार अलग-अलग चार्ज निर्धारित करता है।

कब शुरू होती है कानूनी प्रक्रिया?

यदि अपर्याप्त बैलेंस के कारण चेक बाउंस होता है, तो बैंक चेक प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को रिटर्न मेमो जारी करता है, जिसमें चेक अस्वीकार होने का कारण दर्ज होता है। इसके बाद चेक प्राप्तकर्ता 30 दिनों के भीतर चेक जारी करने वाले को कानूनी नोटिस भेज सकता है। यदि नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो संबंधित व्यक्ति अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। मामले की परिस्थितियों के आधार पर अदालत जुर्माना, चेक की राशि की वसूली और अन्य कानूनी कार्रवाई का आदेश दे सकती है।

 

vineet verma

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