कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर स्थित विशेष MP/MLA अदालत ने मानहानि के एक चर्चित मामले में राहुल गांधी को पूरी तरह दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। विशेष मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने यह राहत भरा फैसला सुनाया। फैसले की इस ऐतिहासिक घड़ी के दौरान खुद राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद रहे।
क्या है राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला?
यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी से जुड़ा है। आरोप है कि 8 मई 2018 को बेंगलुरु में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
इसके बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
मामले में अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को तलब किया। इसके बाद फरवरी 2024 में राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई।
2018 से 2026 तक की पूरी टाइमलाइन
2018: अमित शाह पर टिप्पणी के बाद दर्ज हुआ मामला
- 8 मई 2018: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी की कथित टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ।
- 4 अगस्त 2018: भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई।
2023: अदालत ने राहुल गांधी को किया तलब
- 27 नवंबर 2023: सुल्तानपुर की अदालत ने राहुल गांधी को मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया।
2024: राहुल गांधी को मिली जमानत
- 20 फरवरी 2024: राहुल गांधी अदालत में पेश हुए। इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई।
- 26 जुलाई 2024: राहुल गांधी का बयान अदालत में दर्ज किया गया।
- 9 अक्टूबर 2024: शिकायतकर्ता विजय मिश्रा की गवाही दर्ज हुई।
2025: शिकायतकर्ता पक्ष के गवाहों की गवाही
- 28 फरवरी 2025: शिकायतकर्ता के गवाह अनिल मिश्रा की गवाही दर्ज की गई।
- 8 दिसंबर 2025: शिकायतकर्ता पक्ष के दूसरे गवाह रामचंद्र दुबे की गवाही दर्ज हुई।
2026: वॉयस सैंपल विवाद से अंतिम बहस तक
- 20 फरवरी 2026: राहुल गांधी का बयान दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 के तहत दर्ज किया गया।
- 12 मार्च 2026: शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान कराने के लिए अदालत में आवेदन दिया।
- 21 मई 2026: मजिस्ट्रेट अदालत से आवेदन खारिज होने के बाद शिकायतकर्ता ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी।
- 15 जुलाई 2026: एडीजे अदालत ने निगरानी याचिका खारिज कर दी।
- 10 सितंबर 2026: जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने इसे खारिज कर दिया।
- 6 अक्टूबर 2026: मामले में अंतिम बहस शुरू हुई।
- 12 अक्टूबर 2026: मामले की सुनवाई पूरी हुई।
- 26 अक्टूबर 2026: विशेष MP-MLA अदालत में फैसले की संभावित तारीख।
वॉयस सैंपल को लेकर क्यों हुआ विवाद?
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान कराने की मांग की थी। इस आवेदन को मजिस्ट्रेट अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी, जहां से भी राहत नहीं मिली।
बाद में इस मुद्दे को हाईकोर्ट में उठाया गया, लेकिन वहां भी याचिका खारिज कर दी गई। इस कानूनी प्रक्रिया के कारण मामले में वॉयस सैंपल की जांच को लेकर अलग से विवाद बना रहा।