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Reading: हूती हमलों से सऊदी की तेल सप्लाई पर बड़ा संकट! ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद, क्या अब और महंगा होगा कच्चा तेल?
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Indian Press House > Blog > Trending News > हूती हमलों से सऊदी की तेल सप्लाई पर बड़ा संकट! ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद, क्या अब और महंगा होगा कच्चा तेल?
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हूती हमलों से सऊदी की तेल सप्लाई पर बड़ा संकट! ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद, क्या अब और महंगा होगा कच्चा तेल?

vineet verma
Last updated: September 15, 2026 12:51 pm
vineet verma
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रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच सऊदी अरब ने अपनी अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद कर दी है। इस फैसले से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। पहले से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित है और अब सऊदी की इस पाइपलाइन के बंद होने से बाजार में कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

Contents
हूती हमले के बाद सऊदी ने क्यों बंद की पाइपलाइन?ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद होने से कितना तेल प्रभावित होगा?1200 KM लंबी है ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइनलाल सागर में हूतियों की बढ़ती पकड़ से बढ़ी मुश्किलब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार, आगे और महंगा हो सकता है तेलतेल महंगा हुआ तो आम लोगों पर कैसे पड़ेगा असर?आने वाले दिनों में क्यों बढ़ सकती है महंगाई की चिंता?

हूती हमले के बाद सऊदी ने क्यों बंद की पाइपलाइन?

AP की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने शुक्रवार को हमले के बाद ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद किया। सऊदी अधिकारियों ने इसके लिए इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन हमले को जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों के अनुसार, पाइपलाइन की मरम्मत में 3 से 5 हफ्ते लग सकते हैं।

यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल परिवहन नेटवर्क का अहम हिस्सा है। इसके जरिए कच्चे तेल को फारस की खाड़ी से पश्चिम की ओर लाल सागर तक पहुंचाया जाता है, जिससे तेल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजारे बिना दूसरे बाजारों तक भेजना संभव होता है।

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद होने से कितना तेल प्रभावित होगा?

रिस्टैड एनर्जी के मुताबिक, अगस्त के अंत से इस पाइपलाइन और लाल सागर के यानबू बंदरगाह के जरिए रोजाना औसतन 26 लाख से 40 लाख बैरल तेल की आवाजाही हो रही थी। अब इस सप्लाई पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, रोजाना 40 लाख बैरल तेल वैश्विक आपूर्ति का करीब 4 प्रतिशत है। ऐसे में इतने बड़े प्रवाह में रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव और बढ़ सकता है।

सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन किया था, जबकि अगस्त में उसका उत्पादन घटकर करीब 60 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था।

1200 KM लंबी है ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1200 किलोमीटर लंबी है। यह फारस की खाड़ी के पास स्थित एक प्रोसेसिंग सुविधा से कच्चे तेल को पश्चिमी तट पर लाल सागर तक पहुंचाती है।

यानबू पहुंचने के बाद तेल को टैंकरों में लादा जाता है। यहां से इसे स्वेज नहर के जरिए यूरोप या बाब अल-मंडेब के रास्ते एशिया की ओर भेजा जा सकता है।

इस पाइपलाइन का निर्माण 1980 के दशक में हुआ था। उस समय ईरान-इराक युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल परिवहन बाधित होने की आशंका को देखते हुए वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया था।

लाल सागर में हूतियों की बढ़ती पकड़ से बढ़ी मुश्किल

हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के अहम शिपिंग रूट के आसपास स्थित द्वीपों पर भी कब्जा कर लिया है। इससे सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए खतरा और बढ़ गया है।

हालांकि, कुछ टैंकर अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं, लेकिन वहां जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के मुकाबले काफी कम है। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के पहले सप्ताह में इस रास्ते से 90 बार जहाज गुजरे, जबकि युद्ध से पहले रोजाना करीब 130 जहाज यहां से गुजरते थे।

दक्षिणी लाल सागर का बाब अल-मंडेब भी दबाव में है। मेलियस रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत में इस रास्ते से रोजाना करीब 30 लाख बैरल तेल गुजर रहा था, लेकिन सोमवार तक यह मात्रा लगभग शून्य होने का अनुमान जताया गया।

ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार, आगे और महंगा हो सकता है तेल

सप्लाई में लगातार आ रही रुकावटों का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया।

रिस्टैड एनर्जी के तेल बाजार के उपाध्यक्ष जानिव शाह के मुताबिक, ब्रेंट में ताजा तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार सप्लाई में कमी को लेकर प्रतिक्रिया दे रहा है। हालांकि, सऊदी अरब के पास फिलहाल इतना भंडार है कि वह कुछ समय तक निर्यात जारी रख सकता है, लेकिन स्थिति तेजी से बदल सकती है।

तेल महंगा हुआ तो आम लोगों पर कैसे पड़ेगा असर?

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन महंगा होने से माल ढुलाई, खेती और डिलीवरी नेटवर्क की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेस के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के अंत की तुलना में नाइजीरिया में डीजल 92 प्रतिशत और पेट्रोल करीब 61 प्रतिशत महंगा हुआ है। इंडोनेशिया में डीजल 87 प्रतिशत और पेट्रोल 38 प्रतिशत महंगा हुआ, जबकि लेबनान में डीजल की कीमत 80 प्रतिशत और पेट्रोल की कीमत 46 प्रतिशत बढ़ी।

अमेरिका में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। AAA के मुताबिक, सोमवार को नियमित पेट्रोल की औसत कीमत 4.32 डॉलर प्रति गैलन रही, जो युद्ध से पहले के 2.98 डॉलर के मुकाबले करीब 45 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं डीजल 6.23 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में करीब 66 प्रतिशत अधिक है।

डीजल की महंगाई का असर विशेष रूप से परिवहन और कृषि क्षेत्र पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल लंबी दूरी के ट्रकों, डिलीवरी नेटवर्क और खेती के उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है।

आने वाले दिनों में क्यों बढ़ सकती है महंगाई की चिंता?

विश्लेषकों के मुताबिक, अगर पश्चिम एशिया में तेल आपूर्ति बाधित करने वाली घटनाएं जारी रहती हैं तो आने वाले हफ्तों और महीनों में दबाव और बढ़ सकता है। ऊर्जा के साथ-साथ खाद जैसे जरूरी इनपुट की लागत भी प्रभावित होने की आशंका है।

मेलियस रिसर्च के विश्लेषकों ने अमेरिका में फसल कटाई और हीटिंग सीजन से पहले डीजल की कमी को लेकर भी चिंता जताई है। यानी पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका असर वैश्विक महंगाई पर भी पड़ सकता है।

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TAGGED: Bab al-Mandeb, Brent Crude, crude oil price, East West Pipeline, Middle East Crisis, Oil Supply Crisis, Petrol Diesel Price, Red Sea, Saudi Arabia Oil, Saudi Oil Export, Strait of Hormuz, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, सऊदी अरब तेल पाइपलाइन, हूती हमला
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