नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े नियमों में 1 अक्टूबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नए नियम के तहत पीएफ के लिए वेतन की सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इसका मतलब है कि अब 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी पीएफ के दायरे में लाया जाएगा। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी पीएफ, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ सकेंगे।
15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये हुई वेतन सीमा
EPFO के नए नियमों के तहत पीएफ कवरेज की वेतन सीमा में बढ़ोतरी की गई है। पहले यह सीमा 15 हजार रुपये प्रतिमाह थी, जिसे अब बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। इससे ऐसे कर्मचारी भी पीएफ के दायरे में आ सकेंगे, जो पहले वेतन सीमा के कारण इससे बाहर रह जाते थे।
इस बदलाव का असर खास तौर पर 20 हजार और 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
20 से 25 हजार रुपये सैलरी वालों की टेक होम सैलरी बदलेगी
नए नियम लागू होने के बाद जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन 20 हजार या 25 हजार रुपये है, उनकी टेक होम सैलरी में कुछ बदलाव हो सकता है। इसकी वजह यह है कि पीएफ और ईपीएफ में उनका योगदान शुरू होगा।
यानी हर महीने हाथ में मिलने वाली रकम में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन इसके बदले कर्मचारी के नाम पर भविष्य के लिए पीएफ की बचत जमा होगी।
रिटायरमेंट के लिए बढ़ेगी बचत, पेंशन का भी लाभ
पीएफ में योगदान शुरू होने का सीधा फायदा कर्मचारियों को लंबी अवधि में मिल सकता है। उनके लिए रिटायरमेंट के समय एक मजबूत बचत तैयार होगी। इसके साथ ही पीएफ से जुड़ी पेंशन व्यवस्था का लाभ और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा यानी EDLI के तहत बीमा कवर भी मिल सकेगा।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, नए बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी इन सामाजिक सुरक्षा लाभों के दायरे में आ सकते हैं।
नई व्यवस्था में कर्मचारियों को क्या ध्यान रखना चाहिए
विशेषज्ञों के मुताबिक, कर्मचारियों को अपनी कुल वेतन संरचना के साथ पीएफ में होने वाले योगदान को भी ध्यान में रखना चाहिए। पीएफ कटने के कारण मासिक हाथ में आने वाली रकम में बदलाव होगा, लेकिन दूसरी ओर भविष्य के लिए बचत और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी।
इसलिए 1 अक्टूबर से लागू होने वाले इस बदलाव के बाद कर्मचारियों के लिए अपनी मासिक आय, पीएफ योगदान और भविष्य की बचत को ध्यान में रखकर वित्तीय योजना बनाना महत्वपूर्ण होगा।