महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के खेमे में तहलका मचा दिया है। शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास बगावत का जो 4 पन्नों का सीक्रेट प्रस्ताव भेजा है, उसके अंदर की विस्फोटक कहानी अब बाहर आ चुकी है।
एबीपी न्यूज के सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने पार्टी छोड़ने की जो वजह बताई है, वह सीधे तौर पर संजय राउत (Sanjay Raut) के एक हालिया बयान और पार्टी के अस्तित्व पर मँडराते खतरे से जुड़ी हुई है।
लोकसभा स्पीकर को सौंपे गए प्रस्ताव में बागी सांसदों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर गहरा अविश्वास जताया है। प्रस्ताव में साफ शब्दों में दो सबसे बड़े दावे किए गए हैं:
इस पूरी बगावत का सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि इन 6 सांसदों ने संसद में खुद को कोई ‘स्वतंत्र’ या ‘अलग गुट’ घोषित करने की मांग नहीं की है।
सीधा महा-विलय: सांसदों द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार, उन्होंने अलग थलग रहने के बजाय सीधे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की शिवसेना में अपने गुट का विलय करने का फैसला लिया है। यानी कानूनन एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल कानून) से बचने के लिए उन्होंने दो-तिहाई का आंकड़ा (9 में से 6 सांसद) छूकर सीधे शिंदे कैंप को मजबूत कर दिया है।
उद्धव कैंप ने इस टूट को अवैध बताते हुए दिल्ली में सांसदों को व्हिप (Whip) जारी किया था, लेकिन 6 सांसदों—नागेश आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे ने बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली।
अब सबकी नजरें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर टिकी हैं, जहां सांसदों के हस्ताक्षरों (Signatures) की फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लगी यह सेंध उद्धव ठाकरे के ‘मशाल’ गुट के लिए दिल्ली से लेकर मुंबई तक एक बहुत बड़ा राजनीतिक और वजूद का संकट खड़ी कर चुकी है।
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