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यूपी में ‘ढुंढाई पंचायत’ पर छिड़ा सियासी घमासान! अखिलेश यादव का राजभर और अफसरों पर तीखा तंज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राज्य के सियासी पारे को बढ़ा दिया है। अखिलेश यादव ने अपने इस बयान में न सिर्फ विरोधी नेताओं को आड़े हाथों लिया, बल्कि नौकरशाही और ठेकेदारों के गठजोड़ पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। यूपी राजनीतिक गलियारों में अब अखिलेश द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द “ढुंढाई पंचायत” की जमकर चर्चा हो रही है।

क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ा विवाद?


पिछले कुछ दिनों से सत्तापक्ष और SBSP अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की ओर से समाजवादी पार्टी में अंदरूनी कलह और टूट के दावे किए जा रहे थे। राजभर ने सपा के भविष्य को लेकर कई राजनीतिक भविष्यवाणियाँ भी की थीं। इन दावों पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने मोर्चा संभाला और सीधे जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए विरोधियों को घेरा।

“एडवांस वापसी” की मची है होड़


अखिलेश यादव ने विरोधियों के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने अपने x सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट के जरिए इशारा किया कि: “30 सीटें मिलने” जैसी बातें महज कोरी अफवाहें और हताशा का नतीजा हैं।

अखिलेश यादब ने आगे कहा की “कल तक तो ‘अफ़वाही’ मंत्री जी को केवल वो भावी प्रत्याशी ही ढूँढ रहे थे जिनसे इन्होंने टिकट के नाम पर एडवांस वसूल लिया था, लेकिन अब जो जान गये हैं कि ‘30 सीट’ की बात अफ़वाह है। न तो इन्हें एक भी सीट मिल रही है और ले-देकर मिल भी गई तो भी ये जीतनेवाले नहीं हैं।

इनकी सच्चाई बाहर आते ही अब तो सुना है, वो एई, जेई और एएमए अधिकारी और विभागीय ठेकेदार भी इनको ढूँढने के लिए मिल-बैठकर ‘पंचायत’ कर रहे हैं, जिनसे ट्रांसफ़र-पोस्टिंग व कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने के नाम पर इन्होंने एडवांस वसूल लिया है।

जिस काली-कमाई के पैसे के बल पर इनके ‘बड़े बोल’ निकल रहे हैं, अब वो पैसा ही इनके ख़िलाफ़ ‘पंचायत’ बैठा रहा है।”

चर्चा में ‘ढुंढाई पंचायत’, निशाने पर अफसर और ठेकेदार


अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में “ढुंढाई पंचायत” शब्द का इस्तेमाल कर प्रशासनिक अमले में मचे हड़कंप पर तंज कसा। उन्होंने सीधे तौर पर विभाग के कुछ अधिकारियों और विभागीय ठेकेदारों के गठजोड़ पर निशाना साधा।

सपा सुप्रीमो का आरोप है कि ट्रांसफर, पोस्टिंग और सरकारी टेंडर्स दिलाने के नाम पर जो कथित लेन-देन हुआ था, अब काम न होने की स्थिति में उन लोगों को ढूंढा जा रहा है जिनसे पैसे लिए गए थे। इसी ‘ढूंढने-खोजने’ के खेल को उन्होंने ‘ढुंढाई पंचायत’ का नाम दिया है।

news desk

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