वर्साय। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते ने पूरी दुनिया का ध्यान फ्रांस के वर्साय महल की ओर खींच लिया है। महीनों से जारी तनाव और सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इसी ऐतिहासिक परिसर में समझौते पर हस्ताक्षर किए। दिलचस्प बात यह है कि वर्साय का यही महल एक सदी पहले भी विश्व इतिहास के सबसे बड़े युद्धों में से एक के अंत का गवाह बना था।
वर्साय महल में लिखी गई शांति की नई इबारत
जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित विशेष कार्यक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को अंतिम रूप दिया गया। दोनों देशों ने सैन्य गतिविधियों को रोकने और समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने पर सहमति जताई। इस समझौते को मध्य पूर्व में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि वर्साय महल का नाम केवल इस नए समझौते तक सीमित नहीं है। इतिहास में यह स्थान प्रथम विश्वयुद्ध के आधिकारिक समापन से भी जुड़ा हुआ है।
चार साल तक चला था पहला विश्वयुद्ध
प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत वर्ष 1914 में हुई थी। यूरोप से शुरू हुआ यह संघर्ष धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों को अपनी चपेट में लेता चला गया। करीब चार वर्षों तक चले इस भीषण युद्ध में लाखों लोगों की जान गई और कई देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।
आखिरकार 11 नवंबर 1918 को युद्धविराम लागू हुआ। उस समय जर्मनी और उसके सहयोगी देश सैन्य और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो चुके थे। लगातार लड़ाई, संसाधनों की कमी और आंतरिक राजनीतिक संकट के चलते जर्मनी को युद्ध समाप्त करने का फैसला लेना पड़ा।
ट्रेन के डिब्बे में हुए थे युद्धविराम पर हस्ताक्षर
इतिहास के अनुसार युद्धविराम समझौते पर फ्रांस के एक जंगल में खड़ी रेलगाड़ी के डिब्बे के भीतर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके साथ ही युद्ध की लड़ाई तो थम गई, लेकिन आधिकारिक रूप से शांति स्थापित करने और भविष्य के नियम तय करने की प्रक्रिया अभी बाकी थी।
वर्साय की संधि ने लगाया युद्ध पर अंतिम विराम
युद्धविराम के बाद वर्ष 1919 में फ्रांस में पेरिस शांति सम्मेलन आयोजित किया गया। इसी सम्मेलन के तहत 28 जून 1919 को वर्साय की संधि तैयार की गई, जिसे प्रथम विश्वयुद्ध के आधिकारिक समापन का दस्तावेज माना जाता है।
इस संधि के जरिए विजयी मित्र राष्ट्रों ने युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था तय की। जर्मनी पर कई कठोर शर्तें लगाई गईं और उसे संधि स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसी वजह से वर्साय की संधि विश्व इतिहास की सबसे चर्चित शांति संधियों में गिनी जाती है।
‘बिग फोर’ नेताओं ने तैयार किया था शांति का खाका
प्रथम विश्वयुद्ध को समाप्त कराने और वर्साय संधि को अंतिम रूप देने में चार प्रमुख नेताओं की अहम भूमिका रही थी। इतिहास में इन्हें ‘बिग फोर’ के नाम से जाना जाता है।
इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन, फ्रांस के प्रधानमंत्री जॉर्जेस क्लेमेंसो, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड लॉयड जॉर्ज और इटली के प्रधानमंत्री विटोरियो ओरलैंडो शामिल थे। इन नेताओं ने मिलकर युद्ध के बाद दुनिया की नई राजनीतिक और भौगोलिक व्यवस्था का खाका तैयार किया था।
लीग ऑफ नेशंस का विचार भी यहीं से निकला
युद्ध के बाद स्थायी शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने लीग ऑफ नेशंस के गठन का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य देशों के बीच संवाद बढ़ाना और भविष्य में बड़े युद्धों को रोकना था। हालांकि बाद में यह संस्था अपने उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सकी, लेकिन इसे संयुक्त राष्ट्र जैसी आधुनिक वैश्विक संस्थाओं की नींव माना जाता है।
इतिहास से जुड़ा वर्साय फिर बना वैश्विक सुर्खियों का केंद्र
करीब 107 वर्ष पहले जहां वर्साय ने प्रथम विश्वयुद्ध के अंत का अध्याय देखा था, वहीं अब इसी ऐतिहासिक स्थल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए शांति समझौते को भी दर्ज कर लिया है। यही कारण है कि वर्साय महल एक बार फिर विश्व राजनीति और कूटनीति के केंद्र में आ गया है।
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