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बंगाल में बकरीद से पहले मची खलबली! ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति के बाद बांग्लादेशी प्रवासियों का रिवर्स माइग्रेशन शुरू

पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में इस वक्त जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उनकी कल्पना कुछ महीनों पहले तक किसी ने नहीं की थी। सालों से भारत में रह रहे कथित बांग्लादेशी प्रवासियों में अब वापस अपने वतन लौटने की होड़ मच गई है। उत्तर 24 परगना के हकीमपुर चेकपॉइंट से लेकर मालदा के सीमावर्ती इलाकों तक, हाथ में झोले और सामान लिए लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

यह अचानक आई तब्दीली किसी त्योहार की वजह से नहीं, बल्कि सरकार की नई और सख्त ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (पहचान करो, नाम हटाओ और वापस भेजो) नीति के खौफ का नतीजा है।

मालदा में खुला पहला ‘होल्डिंग सेंटर’


अवैध घुसपैठ पर लगाम कसने के लिए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में मालदा के इंग्लिश बाजार में राज्य का पहला ‘होल्डिंग सेंटर’ क्रियाशील हो चुका है। होल्डिंग सेंटर एक तरह का अस्थायी शिविर है जहां संदिग्ध विदेशी नागरिकों को रखा जा रहा है। हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों और भारी पुलिस बल की निगरानी में यहाँ संदिग्धों के दस्तावेज़ों की जांच और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जा रहा है।

30 दिन की मोहलत


नियमों के मुताबिक, संदिग्धों को यहाँ अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकता है, जिसके बाद उन्हें कानूनी तौर पर डिपोर्ट (देश निकाला) कर दिया जाएगा। जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसएफ (BSF) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त सख्ती के बाद अब कई अवैध प्रवासी कानूनी पचड़े और जेल जाने के डर से खुद ही बॉर्डर चेकपॉइंट्स पर पहुंचकर बांग्लादेश जाने की गुहार लगा रहे हैं।

अब आगे क्या?


राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है की बॉर्डर पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए बीएसएफ ने भी अपनी गश्त तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सख्ती जारी रही, तो आने वाले महीनों में बंगाल में डेमोग्राफिक बैलेंस (जनसांख्यिकीय संतुलन) को लेकर चल रही बहस पर एक बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

news desk

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