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एमपी उपचुनाव: क्यों दतिया से कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट? जानें बीजेपी के इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे की 3 बड़ी वजहें

भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस समय देश भर की सुर्खियों में है। वजह है—भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) का टिकट कटना। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा था कि दतिया से नरोत्तम मिश्रा का चुनावी मैदान में उतरना तय है, लेकिन जब भाजपा ने आशुतोष तिवारी (Ashutosh Tiwari) के नाम का ऐलान किया, तो हर कोई दंग रह गया।

इस फैसले के बाद दतिया में जो सियासी हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, उसने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी थीं। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के गुस्से के कारण 11 घंटे तक हाईवे जाम रहा, जिसका असर 4 जिलों में देखा गया। हालांकि, अब दतिया में बगावत के सुर धीमे पड़ते दिख रहे हैं।

आइए जानते हैं कि हमेशा सुर्खियों में रहने वाले नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के पीछे भाजपा हाईकमान की क्या रणनीति थी और वो कौन से आंकड़े थे जो पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ गए।

1. चुनावी पिच पर लगातार कमजोर हो रहे थे नरोत्तम मिश्रा (चुनावी आंकड़े)

नरोत्तम मिश्रा भले ही टीवी और सोशल मीडिया पर भाजपा का बड़ा चेहरा रहे हों, लेकिन दतिया की जमीनी पिच पर उनका ग्राफ लगातार गिर रहा था।

  • 2018 का कड़ा मुकाबला: 2018 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा बेहद मामूली अंतर से जीते थे। उन्हें 72,209 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने करीब 70 हजार वोट हासिल किए थे। नरोत्तम की जीत का अंतर महज 2,656 वोट का था, जो एक बड़े नेता के लिए खतरे की घंटी था।
  • 2023 की करारी हार: साल 2023 के चुनाव में जब पूरे मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार की ‘लाडली बहना योजना’ की लहर थी और भाजपा ने बंपर जीत हासिल की थी, तब भी नरोत्तम मिश्रा दतिया से अपनी सीट नहीं बचा पाए और राजेंद्र भारती से चुनाव हार गए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार कमजोर होते जनाधार को देखते हुए पार्टी इस उपचुनाव में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती थी।

2. ब्राह्मण समीकरण और ‘नो-रिस्क’ पॉलिसी

भाजपा हाईकमान ने दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर भी जातिगत समीकरणों में कोई बदलाव नहीं होने दिया।

  • आशुतोष तिवारी पर दांव: नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को लाकर भाजपा ने ब्राह्मण कार्ड को बरकरार रखा है।
  • इससे पार्टी ने स्थानीय स्तर पर जातिगत संतुलन को बिगड़ने से बचा लिया और विपक्ष को भी कोई मौका नहीं दिया।

3. भविष्य की राजनीति और नए नेतृत्व की तैयारी

अक्सर कड़े फैसले लेने के लिए जानी जाने वाली भाजपा ने इस कदम से साफ कर दिया है कि वह भविष्य के लिए नए चेहरों को तैयार कर रही है। नरोत्तम मिश्रा की जगह एक नया और युवा चेहरा उतारकर पार्टी ने दतिया में एंटी-इंकंबेंसी (सत्तारूढ़ दल के खिलाफ माहौल) को कम करने और एक नई लीडरशिप लाइन खड़ी करने की कोशिश की है।

इस्तीफों का दौर थमा, नरोत्तम के रुख में भी आई नरमी

टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में दतिया के जिलाध्यक्ष सहित कई स्थानीय भाजपा नेताओं ने सामूहिक इस्तीफे दे दिए थे। हालांकि, भाजपा हाईकमान ने सख्त संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि ये इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

अब खुद नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थक भी बैकफुट पर आते दिख रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के फैसले को अपने ही हित में बताते हुए डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कर दी हैं। लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि क्या आशुतोष तिवारी, नरोत्तम मिश्रा के इस गढ़ में कमल खिलाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।

news desk

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