भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस समय देश भर की सुर्खियों में है। वजह है—भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) का टिकट कटना। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा था कि दतिया से नरोत्तम मिश्रा का चुनावी मैदान में उतरना तय है, लेकिन जब भाजपा ने आशुतोष तिवारी (Ashutosh Tiwari) के नाम का ऐलान किया, तो हर कोई दंग रह गया।
इस फैसले के बाद दतिया में जो सियासी हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, उसने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी थीं। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के गुस्से के कारण 11 घंटे तक हाईवे जाम रहा, जिसका असर 4 जिलों में देखा गया। हालांकि, अब दतिया में बगावत के सुर धीमे पड़ते दिख रहे हैं।
आइए जानते हैं कि हमेशा सुर्खियों में रहने वाले नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के पीछे भाजपा हाईकमान की क्या रणनीति थी और वो कौन से आंकड़े थे जो पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ गए।
नरोत्तम मिश्रा भले ही टीवी और सोशल मीडिया पर भाजपा का बड़ा चेहरा रहे हों, लेकिन दतिया की जमीनी पिच पर उनका ग्राफ लगातार गिर रहा था।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार कमजोर होते जनाधार को देखते हुए पार्टी इस उपचुनाव में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती थी।
भाजपा हाईकमान ने दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर भी जातिगत समीकरणों में कोई बदलाव नहीं होने दिया।
अक्सर कड़े फैसले लेने के लिए जानी जाने वाली भाजपा ने इस कदम से साफ कर दिया है कि वह भविष्य के लिए नए चेहरों को तैयार कर रही है। नरोत्तम मिश्रा की जगह एक नया और युवा चेहरा उतारकर पार्टी ने दतिया में एंटी-इंकंबेंसी (सत्तारूढ़ दल के खिलाफ माहौल) को कम करने और एक नई लीडरशिप लाइन खड़ी करने की कोशिश की है।
टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में दतिया के जिलाध्यक्ष सहित कई स्थानीय भाजपा नेताओं ने सामूहिक इस्तीफे दे दिए थे। हालांकि, भाजपा हाईकमान ने सख्त संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि ये इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
अब खुद नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थक भी बैकफुट पर आते दिख रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के फैसले को अपने ही हित में बताते हुए डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कर दी हैं। लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि क्या आशुतोष तिवारी, नरोत्तम मिश्रा के इस गढ़ में कमल खिलाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।
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