शेयर बाजार में पैसा लगाने के लिए लोग दिन-रात चार्ट देखते हैं, बैलेंस शीट खंगालते हैं और न जाने क्या-क्या रिसर्च करते हैं। लेकिन जरा सोचिए, क्या कोई शेयर सिर्फ एक सोशल मीडिया मीम और ‘कन्फ्यूजन’ के दम पर रॉकेट बन सकता है? कुछ ऐसा ही इन दिनों स्टॉक मार्केट पर एक ऐसा क्रेजी इंसिडेंट हो रहा है, जिसने मार्केट के बड़े-बड़े पंडितों का दिमाग हिला दिया है। घाटे में चल रही एक कंपनी के शेयर को लोग पागलों की तरह खरीद रहे हैं, पर इसके पीछे की जो सच्चाई है, वो होश उड़ाने वाली है।
कहानी शुरू होती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली विजिट से। वहां उन्होंने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। सोशल मीडिया पर पहले से ही दोनों के नाम को मिलाकर ‘Melodi’ ट्रेंड कर रहा था। आग में घी तब डला, जब पीएम मोदी ने उन्हें भारत की एवरग्रीन टॉफी ‘Melody‘ गिफ्ट कर दी। फिर क्या था, रील्स और मीम्स की बाढ़ आ गई।
अब यहाँ एंट्री होती है हमारे ‘FOMO‘ यानि छुट जाने के डर से से रिटेल इन्वेस्टर्स ने सोचा की “मेलोडी ट्रेंड कर रहा है, तो इसकी कंपनी का शेयर तो आसमान छुएगा और हमे इसमें पैसा लगाना चाहिए!”
इंटरनेट पर ‘Melody’ का हाइप देखकर निवेशकों ने बिना सोचे-समझे अपने ट्रेडिंग ऐप्स पर ‘Parle’ सर्च किया। उनके सामने एक नाम आया “Parle Industries”, शेयर की कीमत थी एक ‘पेनी स्टॉक’ यानि 10 रुपए से भी कम।
बस, फिर क्या था इन्वेस्टर्स ने अंधाधुंध बाइंग शुरू हो गई। लोग शेयर पर ऐसे टूटे कि पिछले कुछ दिनों से इसमें लगातार 5% का अपर सर्किट लग रहा है। देखते ही देखते यह शेयर 21% से ज्यादा चढ़कर 11.23 पर पहुंच गया।
जिन लोगों को लग रहा है कि उन्होंने बहुत बड़ा दांव मार लिया है, उनके लिए एक बहुत बड़ा ‘पॉपकॉर्न मोमेंट’ यानी झटका लगने वाला है:
जिस ‘Parle Industries’ के शेयर लोग धड़ाधड़ खरीद रहे हैं, उसका मेलोडी टॉफी या पार्ले-जी बिस्कुट से दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है। यह कंपनी वेस्ट पेपर रीसाइक्लिंग और रियल एस्टेट का काम करती है। जिस कंपनी के शेयर के लिए इस वक़्त मारामारी मची है, वो भयंकर घाटे में है। जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में इस कंपनी को 6.81 लाख रुपये का नेट लॉस हुआ है।
मेलोडी और पार्ले-जी बनाने वाली असली कंपनी का नाम Parle Products है और सबसे बड़ा सस्पेंस ये है कि वो शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं है, यानी उसका कोई शेयर आप खरीद ही नहीं सकते।
मार्केट एक्सपर्ट्स इसे “कन्फ्यूजन ट्रेड” कह रहे हैं। उनका कहना है की जब कम जानकारी वाले लोग सिर्फ नाम देखकर किसी शेयर में कूदते हैं, तो यही होता है और ऐसे मौकों का फायदा ‘ऑपरेटर’ उठाते हैं। वो जानबूझकर शेयर को और ऊपर ले जाते हैं। लेकिन जैसे ही यह सोशल मीडिया का नशा उतरेगा, शेयर में ‘लोअर सर्किट’ लगना शुरू हो जाएगा। उस वक्त जिन लोगों ने इसे महंगे दाम पर खरीदा है, वो इसे बेच भी नहीं पाएंगे क्योंकि मार्केट में कोई खरीदार ही नहीं बचेगा। उनका पैसा पूरी तरह ब्लॉक हो जाएगा।
एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है की शेयर बाजार रील्स के ट्रेंड से नहीं, कंपनी के फंडामेंटल्स और प्रॉफिट से चलता है। अगर आप भी इस ‘पार्ले’ में मेलोडी ढूंढ रहे हैं, तो संभल जाइए… क्योंकि “मेलोडी इतनी चॉकोलेटी क्यों है” इसका जवाब भले मिल जाए, लेकिन पोर्टफोलियो में हुए घाटे का जवाब ढूंढते रह जाओगे।
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